Javed Akhtar Archive

ये तेरा घर ये मेरा घर

ये तेरा घर ये मेरा घर, किसी को देखना हो गर तो पहले आके माँग ले, मेरी नज़र तेरी नज़र ये घर बहुत हसीन है न बादलों की छाँव में, न चाँदनी के गाँव में न फूल जैसे रास्ते, बने …

ये बता दे मुझे ज़िन्दगी

ये बता दे मुझे ज़िन्दगी प्यार की राह के हमसफ़र किस तरह बन गये अजनबी ये बता दे मुझे ज़िन्दगी फूल क्यूँ सारे मुरझा गये किस लिये बुझ गई चाँदनी ये बता दे मुझे ज़िन्दगी कल जो बाहों में थी …

क्यूँ ज़िन्दगी की राह में

क्यूँ ज़िन्दगी की राह में मजबूर हो गए इतने हुए करीब कि हम दूर हो गए ऐसा नहीं कि हमको कोई भी खुशी नहीं लेकिन ये ज़िन्दगी तो कोई ज़िन्दगी नहीं क्यों इसके फ़ैसले हमें मंज़ूर हो गए पाया तुम्हें …

तुमको देखा तो ये ख़याल आया

  तुमको देखा तो ये ख़याल आया ज़िन्दगी धूप तुम घना साया आज फिर दिल ने एक तमन्ना की आज फिर दिल को हमने समझाया तुम चले जाओगे तो सोचेंगे हमने क्या खोया, हमने क्या पाया हम जिसे गुनगुना नहीं …

प्यार मुझसे जो किया तुमने

प्यार मुझसे जो किया तुमने तो क्या पाओगी मेरे हालात की आंधी में बिखर जाओगी रंज और दर्द की बस्ती का मैं बाशिन्दा हूँ ये तो बस मैं हूँ के इस हाल में भी ज़िन्दा हूँ ख़्वाब क्यूँ देखूँ वो …

सो गया ये जहाँ

सो गया, ये जहाँ, सो गया आसमां सो गयीं हैं सारी मंज़िलें ,सो गया है रस्ता रात आई तो वो जिनके घर थे, वो घर को गये, सो गये रात आई तो हम जैसे आवारा फिर निकले, राहों में और …

वक़्त

ये वक़्त क्या है? ये क्या है आख़िर कि जो मुसलसल   गुज़र रहा है ये जब न गुज़रा था, तब कहाँ था कहीं तो होगा गुज़र गया है तो अब कहाँ है कहीं तो होगा कहाँ से आया किधर गया …

इक पल गमों का दरिया

इक पल गमों का दरिया, इक पल खुशी का दरिया रूकता नहीं कभी भी, ये ज़िन्‍दगी का दरिया आँखें थीं वो किसी की, या ख़्वाब की ज़ंजीरे आवाज़ थी किसी की, या रागिनी का दरिया इस दिल की वादियों में, …

भूख

आँख खुल मेरी गई हो गया मैं फिर ज़िन्दा पेट के अन्धेरो से ज़हन के धुन्धलको तक एक साँप के जैसा रेंगता खयाल आया आज तीसरा दिन है आज तीसरा दिन है एक अजीब खामोशी से भरा हुआ कमरा कैसा …

प्‍यास की कैसे लाए

प्‍यास की कैसे लाए ताब कोई नहीं दरिया तो हो सराब  कोई रात बजती थी दूर शहनाई रोया पीकर बहुत शराब कोई कौन सा ज़ख्‍म किसने बख्‍शा है उसका रखे कहाँ हिसाब कोई फिर मैं सुनने लगा हूँ इस दिल …