चाँद गोरी के घर बारात ले के आ गोरी ओट में खड़ी है सौगात ले के आ जो कभी ना बोली गई वो बात ले के आ जो खिल चुके हों फूल से हालात ले के आ जिसमें बेकली भी हो, जिसमें शोखियाँ भी हों जिसमें झिलमिलाती रात की बेहोशियाँ भी हों जिसमें घोंसला भी… Continue reading चाँद गोरी के घर / पीयूष मिश्रा
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जावेद का ख़त…लखनऊ से / पीयूष मिश्रा
लाहौर के उस पहले ज़िले के, दो परगना में पहुँचे रेशम गली के, दूजे कूचे के, चौथे मकाँ में पहुँचे कहते हैं जिसको, दूजा मुलुक उस, पाकिस्ताँ में पहुँचे लिखता हूँ ख़त मैं हिन्दोस्ताँ से, पहलू-ए-हुस्नाँ में पहुँचे ओ हुस्नाँ… मैं तो हूँ बैठा, ओ हुस्नाँ मेरी, यादों पुरानी में खोया पल पल को गिनता,… Continue reading जावेद का ख़त…लखनऊ से / पीयूष मिश्रा
मेरा रँग दे बसन्ती चोला / पीयूष मिश्रा
मेरा रँग दे बसन्ती चोला, माई… मेरे चोले में तेरे माथे का पसीना है और थोड़ी सी तेरे आँचल की बूँदें हैं और थोड़ी सी है तेरे काँपते बूढ़े हाथों की गर्मी और थोड़ा सा है तेरी आँखों की सुर्खी का शोला इस शोले को जो देखा तो आज ये लाल तेरा बोला अरे बोला… Continue reading मेरा रँग दे बसन्ती चोला / पीयूष मिश्रा
सरफ़रोशी की तमन्ना / पीयूष मिश्रा
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है देखना है ज़ोर कितना बाज़ुए-क़ातिल में है वक़्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमाँ हम अभी से क्या बताएँ क्या हमारे दिल में है सरफ़रोशी की… देख फाँसी का ये फंदा ख़ौफ़ से है काँपता उफ़्फ़ कि जल्लादों की हालत भी बड़ी मुश्किल में है नर्म… Continue reading सरफ़रोशी की तमन्ना / पीयूष मिश्रा
पगड़ी सँभाल जट्टा / पीयूष मिश्रा
पगड़ी सँभाल जट्टा उड़ी चली जाए रे पगड़ी की गाँठ पे कोई हाथ ना लगाए रे मोड़ दे हवा के रुख़ को जो वो आड़े आए रे रोक दे उमड़ती रुत को आँख जो दिखाए रे सरकटी उम्मीदों के पल याद में सजाए रे ख़ून से सनी मिट्टी को भूल तो ना जाए रे देख… Continue reading पगड़ी सँभाल जट्टा / पीयूष मिश्रा
ओ रे बाबा हम चाँदी नहीं माँगते / पीयूष मिश्रा
ओ रे बाबा हम चाँदी नहीं माँगते ओ रे बाबा हम सोना नहीं माँगते हम हीरे का खज़ाना नहीं माँगते गर हम कुछ माँगते माँगते हैं तो अपना हक माँगते माँगते माँगते हम यूँ ही कट जाना नहीं माँगते हम यूँ ही जल जाना नहीं माँगते हम यूँ ही मर जाना नहीं माँगते गर हम… Continue reading ओ रे बाबा हम चाँदी नहीं माँगते / पीयूष मिश्रा
नंद भवन को भूषण माई / नंददास
नंद भवन को भूषण माई । यशुदा को लाल, वीर हलधर को, राधारमण सदा सुखदाई ॥ इंद्र को इंद्र, देव देवन को, ब्रह्म को ब्रह्म, महा बलदाई । काल को काल, ईश ईशन को, वरुण को वरुण, महा बलजाई ॥ शिव को धन, संतन को सरबस, महिमा वेद पुराणन गाई । ‘नंददास’ को जीवन गिरिधर,… Continue reading नंद भवन को भूषण माई / नंददास
प्रात समय श्री वल्ल्लभ सुत को / नंददास
प्रात समय श्री वल्ल्लभ सुत को, पुण्य पवित्र विमल यश गाऊँ । सुन्दर सुभग वदन गिरिधर को, निरख निरख दोउ दृगन खिलाऊं ॥ मोहन मधुर वचन श्री मुख तें, श्रवनन सुन सुन हृदय बसाऊँ । तन मन धन और प्रान निवेदन, यह विध अपने को सुफ़ल कराऊँ ॥ रहों सदा चरनन के आगे, महाप्रसाद को… Continue reading प्रात समय श्री वल्ल्लभ सुत को / नंददास
माई आज तो गोकुल ग्राम / नंददास
माई आज तो गोकुल ग्राम कैसो रह्यो फ़ूल के । गृह फूले एसे जैसे संपति समूल के ॥१॥ माई आज तो… फूलि फूलि घटा आईं घर घर घूम के । फूली फूली बरखा होत झर लायो झूम के ॥२॥ माई आज तो… फूल्यो फूल्यो पुत्र देख लियो उर लूमि के । फूली है जसोदा माय… Continue reading माई आज तो गोकुल ग्राम / नंददास
अरी चल दूल्हे देखन जाय / नंददास
अरी चल दूल्हे देखन जाय । सुंदर श्याम माधुरी मूरत अँखिया निरख सिराय ॥१॥ जुर आई ब्रज नार नवेली मोहन दिस मुसकाय । मोर बन्यो सिर कानन कुंडल बरबट मुख ही सुहाय ॥२॥ पहरे बसन जरकसी भूषन अंग अंग सुखकाय । केसी ये बनी बरात छबीली जगमग चुचाय ॥३॥ गोप सबा सरवर में फूले कमल… Continue reading अरी चल दूल्हे देखन जाय / नंददास