nandadas Archive

नंद भवन को भूषण माई / नंददास

नंद भवन को भूषण माई । यशुदा को लाल, वीर हलधर को, राधारमण सदा सुखदाई ॥ इंद्र को इंद्र, देव देवन को, ब्रह्म को ब्रह्म, महा बलदाई । काल को काल, ईश ईशन को, वरुण को वरुण, महा बलजाई ॥ …

प्रात समय श्री वल्ल्लभ सुत को / नंददास

प्रात समय श्री वल्ल्लभ सुत को, पुण्य पवित्र विमल यश गाऊँ । सुन्दर सुभग वदन गिरिधर को, निरख निरख दोउ दृगन खिलाऊं ॥ मोहन मधुर वचन श्री मुख तें, श्रवनन सुन सुन हृदय बसाऊँ । तन मन धन और प्रान …

माई आज तो गोकुल ग्राम / नंददास

माई आज तो गोकुल ग्राम कैसो रह्यो फ़ूल के । गृह फूले एसे जैसे संपति समूल के ॥१॥ माई आज तो… फूलि फूलि घटा आईं घर घर घूम के । फूली फूली बरखा होत झर लायो झूम के ॥२॥ माई …

अरी चल दूल्हे देखन जाय / नंददास

अरी चल दूल्हे देखन जाय । सुंदर श्याम माधुरी मूरत अँखिया निरख सिराय ॥१॥ जुर आई ब्रज नार नवेली मोहन दिस मुसकाय । मोर बन्यो सिर कानन कुंडल बरबट मुख ही सुहाय ॥२॥ पहरे बसन जरकसी भूषन अंग अंग सुखकाय …

भक्त पर करि कृपा श्री यमुने जु ऐसी / नंददास

भक्त पर करि कृपा श्री यमुने जु ऐसी । छांडि निजधाम विश्राम भूतल कियो, प्रकट लीला दिखाई जु तैसी ॥१॥ परम परमारथ करत है सबन कों, देत अद्भुतरूप आप जैसी । नंददास यों जानि दृढ करि चरण गहे, एक रसना …

नेह कारन श्री यमुने प्रथम आई / नंददास

नेह कारन श्री यमुने प्रथम आई । भक्त के चित्त की वृत्ति सब जानके, तहांते अतिहि आतुर जु धाई ॥१॥ जाके मन जैसी इच्छा हती ताहिकी, तैसी ही आय साधजु पुजाई । नंददास प्रभु तापर रीझि रहे जोई श्री यमुनाजी …

ताते श्री यमुने यमुने जु गावो / नंददास

ताते श्री यमुने यमुने जु गावो । शेष सहस्त्र मुख निशदिन गावत, पार नहि पावत ताहि पावो ॥१॥ सकल सुख देनहार तातें करो उच्चार, कहत हो बारम्बार जिन भुलावो । नंददास की आस श्री यमुने पूरन करी, तातें घरी घरी …

भाग्य सौभाग्य श्री यमुने जु देई / नंददास

भाग्य सौभाग्य श्री यमुने जु देई । बात लौकिक तजो, पुष्टि श्री यमुने भजो, लाल गिरिधरन वर तब मिलेई ॥१॥ भगवदीय संग कर बात इनकी लहें, सदा सानिध्य रहें केलि मेई । नंददास जापर कृपा श्रीवल्लभ करें ताकें श्री यमुने …

फल फलित होय फलरूप जाने / नंददास

फल फलित होय फलरूप जाने । देखिहु ना सुनी ताहि की आपुनी, काहु की बात कहो कैसे जु माने ॥१॥ ताहि के हाथ निर्मोल नग दीजिये, जोई नीके करि परखि जाने । सूर कहें क्रूर तें दूर बसिये सदा, श्री …

श्री लक्ष्मण घर बाजत आज बधाई / नंददास

श्री लक्ष्मण घर बाजत आज बधाई । पूरण ब्रह्म प्रकटे पुरुषोत्तम श्री वल्लभ सुखदाई ॥१॥ नाचत वृद्ध तरुण और बालक, उर आनंद न समाई । जयजय यश बंदीजन बोलत विप्रन वेद पढाई ॥२॥ हरद दूब अक्षत दधि कुंकुम आंगन कीच …