भक्त पर करि कृपा श्री यमुने जु ऐसी । छांडि निजधाम विश्राम भूतल कियो, प्रकट लीला दिखाई जु तैसी ॥१॥ परम परमारथ करत है सबन कों, देत अद्भुतरूप आप जैसी । नंददास यों जानि दृढ करि चरण गहे, एक रसना कहा कहो विसेषी ॥२॥
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नेह कारन श्री यमुने प्रथम आई / नंददास
नेह कारन श्री यमुने प्रथम आई । भक्त के चित्त की वृत्ति सब जानके, तहांते अतिहि आतुर जु धाई ॥१॥ जाके मन जैसी इच्छा हती ताहिकी, तैसी ही आय साधजु पुजाई । नंददास प्रभु तापर रीझि रहे जोई श्री यमुनाजी को जस जु गाई ॥२॥
ताते श्री यमुने यमुने जु गावो / नंददास
ताते श्री यमुने यमुने जु गावो । शेष सहस्त्र मुख निशदिन गावत, पार नहि पावत ताहि पावो ॥१॥ सकल सुख देनहार तातें करो उच्चार, कहत हो बारम्बार जिन भुलावो । नंददास की आस श्री यमुने पूरन करी, तातें घरी घरी चित्त लावि ॥२॥
भाग्य सौभाग्य श्री यमुने जु देई / नंददास
भाग्य सौभाग्य श्री यमुने जु देई । बात लौकिक तजो, पुष्टि श्री यमुने भजो, लाल गिरिधरन वर तब मिलेई ॥१॥ भगवदीय संग कर बात इनकी लहें, सदा सानिध्य रहें केलि मेई । नंददास जापर कृपा श्रीवल्लभ करें ताकें श्री यमुने सदाबस जु होई ॥२॥
फल फलित होय फलरूप जाने / नंददास
फल फलित होय फलरूप जाने । देखिहु ना सुनी ताहि की आपुनी, काहु की बात कहो कैसे जु माने ॥१॥ ताहि के हाथ निर्मोल नग दीजिये, जोई नीके करि परखि जाने । सूर कहें क्रूर तें दूर बसिये सदा, श्री यमुना जी को नाम लीजे जु छाने ॥२॥
श्री लक्ष्मण घर बाजत आज बधाई / नंददास
श्री लक्ष्मण घर बाजत आज बधाई । पूरण ब्रह्म प्रकटे पुरुषोत्तम श्री वल्लभ सुखदाई ॥१॥ नाचत वृद्ध तरुण और बालक, उर आनंद न समाई । जयजय यश बंदीजन बोलत विप्रन वेद पढाई ॥२॥ हरद दूब अक्षत दधि कुंकुम आंगन कीच मचाई । वंदन माला मालिन बांधत मोतिन चोक पुराई ॥३॥ फूले द्विजवर दान देत हें… Continue reading श्री लक्ष्मण घर बाजत आज बधाई / नंददास
माई फूल को हिंडोरो बन्यो, फूल रही यमुना / नंददास
माई फूल को हिंडोरो बन्यो, फूल रही यमुना । फूलन के खंभ दोऊ, डांडी चार फूलन की, फूलन बनी मयार फूल रहे विलना ॥१॥ तामें झूले नंदलाल सखी सब गावें ख्याल, बायें अंग राधा प्यारी फूल भयी मगना । फूले पशु पंछी सब, देख ताप कटे सब, फूले सब ग्वाल बाल मिटे दुःख द्वंदना॥२॥ फूले… Continue reading माई फूल को हिंडोरो बन्यो, फूल रही यमुना / नंददास
झूलत राधामोहन / नंददास
झूलत राधामोहन, कालिंदी के कूल। सघन लता सुहावनी, चहुंदिश फूलें फूल ॥१॥ सखी जुरी चहुँदिश तें, कमल नयन की ओर। बोलत वचन अमृतमय, नंददास चित्तचोर॥२॥
जुरि चली हें बधावन नंद महर घर / नंददास
जुरि चली हें बधावन नंद महर घर सुंदर ब्रज की बाला। कंचन थार हार चंचल छबि कही न परत तिहिं काला॥१॥ डरडहे मुख कुमकुम रंग रंजित , राजत रस के एना। कंचन पर खेलत मानो खंजन अंजन युत बन नैना॥२॥ दमकत कंठ पदक मणि कुंडल, नवल प्रेम रंग बोरी। आतुर गति मानो चंद उदय भयो,… Continue reading जुरि चली हें बधावन नंद महर घर / नंददास
सूर आयौ माथे पर, छाया आई पाँइन तर / नंददास
सूर आयौ माथे पर, छाया आई पाइँन तर, उतर ढरे पथिक डगर देखि छाँह गहरी । सोए सुकुमार लोग जोरि कै किंवार द्वार, पवन सीतल घोख मोख भवन भरत गहरी ॥ धंधी जन धंध छाँड़ि, जब तपत धूप डरन, पसु-पंछी जीव-जंतु छिपत तरुन सहरी । नंददास प्रभु ऐसे में गवन न कीजै कहुँ, माह की… Continue reading सूर आयौ माथे पर, छाया आई पाँइन तर / नंददास