एक कदम / चंद्र कुमार जैन

अंधेरा चाहे जितना घना हो पहाड़ चाहे जितना तना हो एक लौ यदि लग जाए एक कदम यदि उठ जाए कम हो जाता है अंधेरे का असर झुक जाती है पहाड़ की भी नज़र अंधेरा तो रौशनी की रहनुमायी है पहाड़ तो प्रेम की परछाईं है सच तो यह है – धाराओं के विपरीत जो… Continue reading एक कदम / चंद्र कुमार जैन

समझौता / चंद्र कुमार जैन

चीर हरण सत्ता की द्रोपदी का जाने कितने सालों से होता रहा है, और मेरे देश का कृष्ण कुंभकरण की तरह सोता रहा है ! अब मत ढूंढा कोई सावित्री या सीता इस देश में क्योंकि प्रजा का रक्षक राम अपने हाथों में धनुष और बाण की जगह घृण और घोटाला लिये फिरता है, और… Continue reading समझौता / चंद्र कुमार जैन

जीवन के गीत लिखो / चंद्र कुमार जैन

जीवन के गीत लिखो ! कितनी भी पीड़ा हो तुम हँसते मीत दिखो संकल्पी आँखों में सूरज के सपने ले अंधियारी रातों में एक दिया बार दो पलको पर जो ठहरे आँसू उनको भी तुम मोती-सी कीमत तो अंतस् का प्यार दो और नई रीत लिखो जीवन के गीत… जीवन की गागर से छलक-छलक जो… Continue reading जीवन के गीत लिखो / चंद्र कुमार जैन

आंचल भर लो / चंद्र कुमार जैन

छोड़ो अब सपनों की बातें बीत गई नींदों की रातें याद रखो पर – नींदों को नीलाम नहीं करना है सपनों को बदनाम नहीं करना है ! बीते पल की धूमिल बातें अब बिसराओ मेरे साथी, सूरज अभिनंदन करता है गले लगाओ मेरे साथी ! यदि बीते से प्रेम अधिक है याद भाहीदों की तुम… Continue reading आंचल भर लो / चंद्र कुमार जैन

बिटिया मेरी / चंद्र कुमार जैन

न जाने खो गयी बिटिया मेरी तीन साल की उम्र से वह मेरी आँखों का नूर चली गई है मुझसे दूर खो गई है पैसों की खनक में बस गई महलों की रौनक में वह मेरी प्यारी शाहजादी सब कहते उसको आजादी

अनुभूति / चंद्र कुमार जैन

चाहता हूँ मन खुले ऊन के गोले की तरह कि बुन सकूँ स्वेटर कविता की… चाहता हूँ धुना जाये यह मन कपास के गट्ठर की तरह कि पिरो सकूँ धागो में जीवन के बिखरे फूलों को कि बना सकूँ एक माला अनुभूति की…

ताना-बाना / चंद्र कुमार जैन

फूल खिले झर गये कॉटे मिले बिखर गये सुख आया चला गया दु:ख आया नहीं रहा मिलना और बिछुड़ जाना यही है जीवन का ताना-बाना नियम बस एक ही है यहॉ जो आज है वह कल नहीं है…

इति-हास / चंद्र कुमार जैन

इतिहास में हो जब हास की इति तब होता है वि वास का अथ कहानी अतीत की सत्य साधना के नवनीत की भर देती है झोली खिल उठते हैं प्रसून अंतर्मन के इसीलिये इतिहास – सूत्र हैं हितकारी जन-जन के

सच्चा संत / चंद्र कुमार जैन

संत किसी अंत से नहीं डरता कठिनाइयॉ उसकी पगडंडियँ हैं उपसर्ग उसे पथ बताते हैं वन, उपवन, उद्यानों का सौंदर्य उसे रिझाता नहीं स्वर्ग का सुख वैभव भी उसे भाता नहीं संत तो हिमगिरि के गर्भ से उत्पन्न होकर सिंधु-पथ गामी बनने में ही जीवन की सार्थकता मानता है सिंधु-वत हो जाने का संकल्प ठानता… Continue reading सच्चा संत / चंद्र कुमार जैन

आलोकित कल होगा / चंद्र कुमार जैन

जीवनदान करें, बेला है बलिदानों की आज ! प्रात: से रवि टेर रहा है ललित प्रभा का बीज उगाओ धरती के कोने-कोने में मानवता का अलख जगाओ त्याग, दया, करूणा के घर में, सफल बनें सब काज ! कण-कण, तृण-तृण आमंत्रित कर, महा शक्ति का प्राण जगाओ, फूलों से कोमलता लेकर नवजीवन के गीत सुनाओ… Continue reading आलोकित कल होगा / चंद्र कुमार जैन