ख़ातिर से तेरी याद को टलने नहीं देते सच है कि हम ही दिल को संभलने नहीं देते आँखें मुझे तलवों से वो मलने नहीं देते अरमान मेरे दिल का निकलने नहीं देते किस नाज़ से कहते हैं वो झुंझला के [ithoughts_tooltip_glossary-tooltip content=”मिलन की रात”]शब-ए-वस्ल[/ithoughts_tooltip_glossary-tooltip] तुम तो हमें करवट भी बदलने नहीं देते परवानों ने… Continue reading अरमान मेरे दिल का निकलने नहीं देते / अकबर इलाहाबादी
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एक बूढ़ा नहीफ़-ओ-खस्ता दराज़ / अकबर इलाहाबादी
एक बूढ़ा नहीफ़-ओ-खस्ता दराज़ इक ज़रूरत से जाता था बाज़ार ज़ोफ-ए-पीरी से खम हुई थी कमर राह बेचारा चलता था रुक कर चन्द लड़कों को उस पे आई हँसी क़द पे फबती कमान की सूझी कहा इक लड़के ने ये उससे कि बोल तूने कितने में ली कमान ये मोल पीर मर्द-ए-लतीफ़-ओ-दानिश मन्द हँस के… Continue reading एक बूढ़ा नहीफ़-ओ-खस्ता दराज़ / अकबर इलाहाबादी
उन्हें शौक़-ए-इबादत भी है / अकबर इलाहाबादी
उन्हें शौक़-ए-इबादत भी है और गाने की आदत भी निकलती हैं दुआऐं उनके मुंह से ठुमरियाँ होकर तअल्लुक़ आशिक़-ओ-माशूक़ का तो लुत्फ़ रखता था मज़े अब वो कहाँ बाक़ी रहे बीबी मियाँ होकर न थी मुतलक़ तव्क़्क़ो बिल बनाकर पेश कर दोगे मेरी जाँ लुट गया मैं तो तुम्हारा मेहमाँ होकर हक़ीक़त में मैं एक… Continue reading उन्हें शौक़-ए-इबादत भी है / अकबर इलाहाबादी
मेरा उसका परिचय इतना / अंसार कम्बरी
मेरा उसका परिचय इतना वो नदिया है, मैं मरुथल हूँ। उसकी सीमा सागर तक है मेरा कोई छोर नहीं है। मेरी प्यास चुरा ले जाए ऐसा कोई चोर नहीं है। मेरा उसका इतना नाता वो ख़ुशबू है, मैं संदल हूँ। उस पर तैरें दीप शिखाएँ सूनी सूनी मेरी राहें। उसके तट पर भीड़ लगी है… Continue reading मेरा उसका परिचय इतना / अंसार कम्बरी
खुदा परस्त दुआ ढूंढ रहे हैं / अंसार कम्बरी
वो हैं के वफ़ाओं में खता ढूँढ रहे हैं, हम हैं के खताओं में वफ़ा ढूँढ रहे हैं। हम हैं खुदा परस्त दुआ ढूँढ रहे हैं, वो इश्क के बीमार दवा ढूँढ रहे हैं। तुमने बड़े ही प्यार से जो हमको दिया है, उस ज़हर में अमृत का मज़ा ढूँढ रहे हैं। माँ-बाप अगर हैं… Continue reading खुदा परस्त दुआ ढूंढ रहे हैं / अंसार कम्बरी
वो तपोवन हो के राजा का महल / अंसार कम्बरी
वो तपोवन हो के राजा का महल, प्यास की सीमा कोई होती नहीं, हो गये लाचार विश्वामित्र भी, मेनका मधुमास लेकर आ गयी। तृप्ति तो केवल क्षणिक आभास है, और फिर संत्रास ही संत्रास है, शब्द-बेधी बाण, दशरथ की व्यथा, कैकेयी के मोह का इतिहास है, इक ज़रा सी भूल यूँ शापित हुई, राम का… Continue reading वो तपोवन हो के राजा का महल / अंसार कम्बरी
कलजुगी दोहे / अंसार कम्बरी
केवल परनिंदा सुने, नहीं सुने गुणगान। दीवारों के पास हैं, जाने कैसे कान ।। सूफी संत चले गए, सब जंगल की ओर। मंदिर मस्जिद में मिले, रंग बिरंगे चोर ।। सफल वही है आजकल, वही हुआ सिरमौर। जिसकी कथनी और है, जिसकी करनी और।। हमको यह सुविधा मिली, पार उतरने हेतु। नदिया तो है आग… Continue reading कलजुगी दोहे / अंसार कम्बरी
मार्खेज को डिमेंशिया हो गया है / अंशु मालवीय
मार्खेज को डिमेंशिया हो गया है। जीवन की उत्ताल तरंगों के बीच गिर-गिर पड़ते हैं स्मृति की नौका से बिछल-बिछलकर; फिर भरसक-भरजाँगर कोशिश कर बमुश्किल तमाम चढ़ पाते हैं नौका पर, उखड़ती साँसों की बारीक डोर थाम। जिसे इनसानियत का सत्व मानते हैं वह वही स्मृति साथ छोड़ रही है उनका विस्मृति के महाप्रलय में… Continue reading मार्खेज को डिमेंशिया हो गया है / अंशु मालवीय
करमन की गति न्यारी / अंशु मालवीय
कर्ज़ की हमको दवा बताई कर्ज़ ही थी बीमारी साधो ! करमन की गति न्यारी । गेहूँ उगे शेयर नगरी में खेतों में बस भूख उग रही मूल्य सूचकांक पे चिड़िया गाँव शहर की प्यास चुग रही करखानों में हाथ कट रहे मक़तल में त्यौहारी साधो ! करमन की गति न्यारी । बढ़ती महंगाई की रस्सी ग्रोथ… Continue reading करमन की गति न्यारी / अंशु मालवीय
…संतानें हतभागी / अंशु मालवीय
जब से भूख तुम्हारी जागी धरती बिकी बिकी धरती की संतानें हतभागी पांड़े कौन कुमति तोहे लागी ! धरती के भीतर का लोहा काढ़ा, हमने तार खिंचाए तार पे फटी दिहाड़ी लटकी बिजली की विरुदावलि गाए जब से भूख तुम्हारी जागी लोहा बिका बिकी लोहे की संतानें हतभागी ! पांड़े कौन कुमति तोहे लागी ! धरती के भीतर… Continue reading …संतानें हतभागी / अंशु मालवीय