Mirza Ghalib Archive

आ कि मेरी जान को क़रार नहीं है

आ कि मेरी जान को क़रार नहीं है ताक़ते-बेदादे-इन्तज़ार नहीं है देते हैं जन्नत हयात-ए-दहर के बदले नश्शा बअन्दाज़-ए-ख़ुमार नहीं है गिरिया निकाले है तेरी बज़्म से मुझ को हाये! कि रोने पे इख़्तियार नहीं है हम से अबस है …

हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है

हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है तुम्हीं कहो कि ये अंदाज़-ए-गुफ़्तगू क्या है न शोले में ये करिश्मा न बर्क़ में ये अदा कोई बताओ कि वो शोखे-तुंदख़ू क्या है ये रश्क है कि वो …

शुमार-ए सुबह मरग़ूब-ए बुत-ए-मुश्किल पसंद आया

शुमार-ए सुबह मरग़ूब-ए बुत-ए-मुश्किल पसंद आया तमाशा-ए बयक-कफ़ बुरदन-ए सद दिल पसंद आया ब फ़ैज़-ए बे-दिली नौमीदी-ए जावेद आसां है कुशायिश को हमारा `उक़द-ए मुश्किल पसंद आया हवा-ए सैर-ए गुल आईना-ए बे-मिहरी-ए क़ातिल कि अंदाज़-ए ब ख़ूं-ग़लतीदन-ए बिस्मिल पसंद आया …

ज़हर-ए-ग़म कर चुका था मेरा काम

न होगा यक बयाबाँ माँदगी से ज़ौक़ कम मेरा हुबाब-ए-मौज-ए-रफ़्तार है, नक़्श-ए-क़दम मेरा मुहब्बत थी चमन से, लेकिन अब ये बेदिमाग़ी है के मौज-ए-बू-ए-गुल से नाक में आता है दम मेरा

हर क़दम दूरी-ए-मंज़िल है नुमायाँ मुझसे

हर क़दम दूरी-ए-मंज़िल है नुमायाँ   मुझसे मेरी रफ़्तार से भागे है बयाबाँ मुझसे दर्से-उन्वाने-तमाशा   बा-तग़ाफ़ुल   ख़ुशतर हैनिगहे- रिश्ता-ए-शीराज़ा-ए-मिज़गाँ वहशते-आतिशे-दिल  से शबे-तन्हाई   में सूरते-दूद  रहा साया गुरेज़ाँ   मुझसे ग़मे-उश्शाक़  न हो सादगी आमोज़े-बुताँ    किस क़दर ख़ाना-ए- आईना   है वीराँ …

ख़ुश हो ऐ बख़्त दक है आज तेरे सर सेहरा

ख़ुश हो ऐ बख़्त  कि है आज तेरे सर सेहरा बाँध शहज़ादा जवाँ बख़्त के सर पर सेहरा क्या ही इस चाँद-से मुखड़े पे भला लगता है है तेरे हुस्ने-दिल अफ़रोज़  काज़ेवर  सेहरा सर पे चढ़ना तुझे फबता है पर …

कलकत्ते का जो ज़िक्र किया तूने हमनशीं

कलकत्ते का जो ज़िक्र किया तूने हमनशीं इक तीर मेरे सीने में मारा के हाये हाये वो सब्ज़ा ज़ार हाये मुतर्रा के है ग़ज़ब वो नाज़नीं बुतान-ए-ख़ुदआरा के हाये हाये सब्रआज़्मा वो उन की निगाहें के हफ़ नज़र ताक़तरूबा वो …