दर्पण को देखा तूने जब जब किया श्रृंगार फूलों को देखा तूने जब जब आई बहार एक बदनसीब हूँ मैं मुझे नहीं देखा एक बार सूरज की पहली किरनों को देखा तूने अलसाते हुए रातों में तारों को देखा सपनों में खो जाते हुए यूँ किसी न किसी बहाने तूने देखा सब संसार काजल की… Continue reading दर्पण को देखा तूने / इंदीवर
दुश्मन न करे दोस्त ने / इंदीवर
दुश्मन न करे दोस्त ने वो काम किया है उम्र भर का ग़म हमें ईनाम दिया है तूफ़ां में हमको छोड़ के साहिल पे आ गये नाख़ुदा का हमने जिन्हें नाम दिया है उम्र भर का ग़म … पहले तो होश छीन लिये ज़ुल्म-ओ-सितम से दीवानगी का फिर हमें इल्ज़ाम दिया है उम्र भर का… Continue reading दुश्मन न करे दोस्त ने / इंदीवर
हम छोड़ चले हैं महफ़िल को / इंदीवर
हम छोड़ चले हैं महफ़िल को याद आए कभी तो मत रोना इस दिल को तसल्ली दे देना घबराए कभी तो मत रोना हम छोड़ चले हैं महफ़िल को … एक ख़्वाब सा देखा था हमने जब आँख खुली वो टूट गया ये प्यार अगर सपना बनकर तड़पाये कभी तो मत रोना हम छोड़ चले… Continue reading हम छोड़ चले हैं महफ़िल को / इंदीवर
जो तुमको हो पसंद वही बात करेंगे / इंदीवर
जो तुमको हो पसंद, वही बात करेंगे तुम दिन को अगर रात कहो, रात कगेंगे जो तुमको … चाहेंगे, निभाएंगे, सराहेंगे आप ही को आँखों में दम है जब तक, देखेंगे आप ही को अपनी ज़ुबान से आपके जज़्बात कहेंगे तुम दिन को अगर रात कहो, रात कहेंगे जो तुमको हो पसंद … देते न… Continue reading जो तुमको हो पसंद वही बात करेंगे / इंदीवर
है प्रीत जहाँ की रीत सदा / इंदीवर
जब ज़ीरो दिया मेरे भारत ने भारत ने मेरे भारत ने दुनिया को तब गिनती आई तारों की भाषा भारत ने दुनिया को पहले सिखलाई देता ना दशमलव भारत तो यूँ चाँद पे जाना मुश्किल था धरती और चाँद की दूरी का अंदाज़ लगाना मुश्किल था सभ्यता जहाँ पहले आई पहले जनमी है जहाँ पे… Continue reading है प्रीत जहाँ की रीत सदा / इंदीवर
कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे / इंदीवर
कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे, तड़पता हुआ जब कोई छोड़ दे तब तुम मेरे पास आना प्रिये, मेरा दर खुला है खुला ही रहेगा तुम्हारे लिये, कोई जब … अभी तुमको मेरी ज़रूरत नहीं, बहुत चाहने वाले मिल जाएंगे अभी रूप का एक सागर हो तुम, कंवल जितने चाहोगी खिल जाएंगे दर्पण तुम्हें जब… Continue reading कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे / इंदीवर
प्रभु जी मेरे अवगुन चित ना धरो / इंदीवर
प्रभु जी मेरे अवगुन चित ना धरो समदरसी है नाम तुम्हारो, नाम की लाज करो प्रभु जी मेरे अवगुन चित ना धरो.. एक नदी एक नाला कहाय, मैल हो नीर भरो गंगा में मिल कर दोनों, गंगा नाम परो प्रभु जी मेरे अवगुन चित ना धरो.. काँटे और कलियाँ दोनों से, मधुबन रहे भरो माली… Continue reading प्रभु जी मेरे अवगुन चित ना धरो / इंदीवर
मुझे नहीं पूछनी तुमसे बीती बातें / इंदीवर
मुझे नहीं पूछनी तुमसे बीती बातें कैसे भी गुज़ारी हों तुमने अपनी रातें जैसी भी हो बस आज से तुम मेरी हो मेरी ही बनके रहना, मुझे तुमसे है इतना कहना मुझे नहीं पूछनी … बीते हुए कल पे तुम्हारे अधिकार नहीं है मेरा उस द्वार पे मैं क्यों जाऊँ जो द्वार नहीं है मेरा… Continue reading मुझे नहीं पूछनी तुमसे बीती बातें / इंदीवर
फूल तुम्हें भेजा है ख़त में / इंदीवर
फूल तुम्हें भेजा है ख़त में, फूल नहीं मेरा दिल है प्रीयतम मेरे तुम भी लिखना, क्या ये तुम्हारे क़ाबिल है प्यार छिपा है ख़त में इतना, जितने सागर में मोती चूम ही लेता हाथ तुम्हारा, पास जो मेरे तुम होती फूल तुम्हें भेजा है ख़त में … नींद तुम्हें तो आती होगी, क्या देखा… Continue reading फूल तुम्हें भेजा है ख़त में / इंदीवर
वक़्त करता जो वफ़ा / इंदीवर
वक़्त करता जो वफ़ा आप हमारे होते हम भी ग़ैरों की तरह आप को प्यारे होते वक़्त करता जो वफ़ा … अपनी तक़दीर में पहले ही कूछ तो ग़म हैं और कुछ आप की फ़ितरत में वफ़ा भी कम है वरन जीती हुई बाज़ी तो ना हारे होते वक़्त करता जो वफ़ा … हम भी… Continue reading वक़्त करता जो वफ़ा / इंदीवर