किसी दिन, चाहते हैं / ऐतबार साज़िद

किसी दिन, चाहते हैं चुपके से हम उस के जीने पर कोई जलता दिया, कुछ फूल रख आयें के अपने बचपन में वो अंधेरों से भी डरता था उसेफूलों की खुशबू से भी रघबत थी बोहत मुमकिन है, अब भी शब की तारीकी से उस को खौफ आता हो महकते फूल शायद बैस-ए-तस्कीन अब भी… Continue reading किसी दिन, चाहते हैं / ऐतबार साज़िद

फिर उसके जाते ही दिल सुनसान हो कर रह गया / ऐतबार साज़िद

फिर उसके जाते ही दिल सुनसान हो कर रह गया अच्छा भला इक शहर वीरान हो कर रह गया हर नक्श बतल हो गया अब के दयार-ए-हिज्र में इक ज़ख्म गुज़रे वक्त की पहचान हो कर रह गया रुत ने मेरे चारों तरफ खींचें हिसार-ए-बाम-ओ-दर यह शहर फिर मेरे लिए ज़ान्दान हो कर रह गया… Continue reading फिर उसके जाते ही दिल सुनसान हो कर रह गया / ऐतबार साज़िद

भरी महफ़िल में तन्हाई का आलम ढूंढ़ लेता हूँ / ऐतबार साज़िद

भरी महफ़िल में तन्हाई का आलम ढूंढ़ लेता हूँ जहाँ जाता हूँ अपने दिल का मौसम ढूंढ़ लेता हूँ अकेला खुद को जब ये महसूस करता हूँ किसी लम्हे किसी उम्मीद का चेहरा, कोई गम ढूंढ़ लेता हूँ बोहत हंसी नजर आती हैं जो ऑंखें सर-ए-महफ़िल मैं इन आँखों के पीछे चस्म-ए-पूर्णम ढूंढ़ लेता हूँ… Continue reading भरी महफ़िल में तन्हाई का आलम ढूंढ़ लेता हूँ / ऐतबार साज़िद

ऐसा नहीं के तेरे बाद अहल-ए-करम नहीं मिले / ऐतबार साज़िद

ऐसा नहीं के तेरे बाद अहल-ए-करम नहीं मिले तुझ सा नहीं मिला कोई, लोग तो कम नहीं मिले इक तेरी जुदाई के दर्द की बात और है जिन को न सह सके ये दिल, ऐसे तो गम नहीं मिले तुझ से बिछड़ने की खता, इस के सिवा है और क्या मिल न सकी तबीयतें, अपने… Continue reading ऐसा नहीं के तेरे बाद अहल-ए-करम नहीं मिले / ऐतबार साज़िद

तुम को तो ये सावन की घटा कुछ नहीं कहती / ऐतबार साज़िद

तुम को तो ये सावन की घटा कुछ नहीं कहती हम सोख्ता लोगो को ये क्या कुछ नहीं कहती हो लाख कोई शोर मचाता हुआ मौसम दिल चुप हो तो बहार की फिजा कुछ नहीं कहती क्यूँ रेत पे बैठे हो झुकाए हुए सर को के तुमको समंदर की हवा कुछ नहीं कहती पूछा के… Continue reading तुम को तो ये सावन की घटा कुछ नहीं कहती / ऐतबार साज़िद

तुम्हारे जैसे लोग जबसे मेहरबान नहीं रहे / ऐतबार साज़िद

तुम्हारे जैसे लोग जबसे मेहरबान नहीं रहे तभी से ये मेरे जमीन-ओ-आसमान नहीं रहे खंडहर का रूप धरने लगे है बाग शहर के वो फूल-ओ-दरख्त, वो समर यहाँ नहीं रहे सब अपनी अपनी सोच अपनी फिकर के असीर हैं तुम्हारें शहर में मेरे मिजाज़ दा नहीं रहें उसे ये गम है, शहर ने हमारी बात… Continue reading तुम्हारे जैसे लोग जबसे मेहरबान नहीं रहे / ऐतबार साज़िद

यूँ ही सी एक बात थी, उस का मलाल क्या करें / ऐतबार साज़िद

यूँ ही सी एक बात थी, उस का मलाल क्या करें मीर-ए-खराब हाल सा अपना भी हाल, क्या करें? ऐसी फिजा के कहर में ऐसी हवा के ज़हर में जिंदा हैं ऐसे शहर में और कमाल क्या करें? और बहुत सी उलझने तूक-ओ-रसं से बढ़ के हैं ज़िक्र-ए-ज़माल क्या करे, फ़िक्र-ए-विसाल क्या करें? ढूंढ़ लिए… Continue reading यूँ ही सी एक बात थी, उस का मलाल क्या करें / ऐतबार साज़िद

कोई कैसा हम सफर है, ये अभी से मत बताओ / ऐतबार साज़िद

कोई कैसा हम सफर है, ये अभी से मत बताओ अभी क्या पता किसी का, के चली नहीं है नाव ये ज़रूरी तो नहीं है, के सदा रहे मरासिम ये सफर की दोस्ती है, इसे रोग मत बनाओ मेरे चारागर बोहत हैं, ये खलिश मगर है दिल में कोई ऐसा हो के, जिस को हों… Continue reading कोई कैसा हम सफर है, ये अभी से मत बताओ / ऐतबार साज़िद

मेरी रातों की राहत, दिन के इत्मिनान ले जाना / ऐतबार साज़िद

मेरी रातों की राहत, दिन के इत्मिनान ले जाना तुम्हारे काम आ जायेगा, यह सामान ले जाना तुम्हारे बाद क्या रखना अना से वास्ता कोई ? तुम अपने साथ मेरा उम्र भर का मान ले जाना शिकस्ता के कुछ रेज़े पड़े हैं फर्श पर, चुन लो अगर तुम जोड़ सको तो यह गुलदान ले जाना… Continue reading मेरी रातों की राहत, दिन के इत्मिनान ले जाना / ऐतबार साज़िद

ये ठीक है के बहुत वहशतें भी ठीक / ऐतबार साज़िद

ये ठीक है के बहुत वहशतें भी ठीक नहीं मगर हमारी ज़रा आदतें भी ठीक नहीं अगर मिलो तो खुले दिल के साथ हम से मिलो के रस्मी रस्मी सी ये चाहतें भी ठीक नहीं तअल्लुक़ात में गहराइयाँ तो अच्छी हैं किसी से इतनी मगर क़ुर्बतें भी ठीक नहीं दिल ओ दिमाग़ से घायल हैं… Continue reading ये ठीक है के बहुत वहशतें भी ठीक / ऐतबार साज़िद