अच्छे मीठे फल चाख चाख, बेर लाई भीलणी। ऎसी कहा अचारवती, रूप नहीं एक रती। नीचे कुल ओछी जात, अति ही कुचीलणी। जूठे फल लीन्हे राम, प्रेम की प्रतीत त्राण। उँच नीच जाने नहीं, रस की रसीलणी। ऎसी कहा वेद पढी, छिन में विमाण चढी। हरि जू सू बाँध्यो हेत, बैकुण्ठ में झूलणी। दास मीरा… Continue reading अच्छे मीठे फल चाख चाख / मीराबाई
भजु मन चरन कँवल अविनासी / मीराबाई
भजु मन चरन कँवल अविनासी। जेताइ दीसे धरण-गगन-बिच, तेताई सब उठि जासी। कहा भयो तीरथ व्रत कीन्हे, कहा लिये करवत कासी। इस देही का गरब न करना, माटी मैं मिल जासी। यो संसार चहर की बाजी, साँझ पडयाँ उठ जासी। कहा भयो है भगवा पहरयाँ, घर तज भए सन्यासी। जोगी होय जुगति नहिं जाणी, उलटि… Continue reading भजु मन चरन कँवल अविनासी / मीराबाई
तोती मैना राधे कृष्ण बोल / मीराबाई
तोती मैना राधे कृष्ण बोल। तोती मैना राधे कृष्ण बोल॥ध्रु०॥ येकही तोती धुंडत आई। लकट किया अनी मोल॥तोती मै०॥१॥ दाना खावे तोती पानी पीवे। पिंजरमें करत कल्लोळ॥ तो०॥२॥ मीराके प्रभु गिरिधर नागर। हरिके चरण चित डोल॥ तो०॥३॥
कुबजानें जादु डारा / मीराबाई
कुबजानें जादु डारा। मोहे लीयो शाम हमारारे॥ कुबजा०॥ध्रु०॥ दिन नहीं चैन रैन नहीं निद्रा। तलपतरे जीव हमरारे॥ कुब०॥१॥ निरमल नीर जमुनाजीको छांड्यो। जाय पिवे जल खारारे॥ कु०॥२॥ इत गोकुल उत मथुरा नगरी। छोड्यायो पिहु प्यारा॥ कु०॥३॥ मोर मुगुट पितांबर शोभे। जीवन प्रान हमारा॥ कु०॥४॥ मीराके प्रभु गिरिधर नागर। बिरह समुदर सारा॥ कुबजानें जादू डारारे कुब०॥५॥
जमुनाजीको तीर दधी बेचन जावूं / मीराबाई
जमुनाजीको तीर दधी बेचन जावूं॥ध्रु०॥ येक तो घागर सिरपर भारी दुजा सागर दूर॥१॥ कैसी दधी बेचन जावूं एक तो कन्हैया हटेला दुजा मखान चोर॥ कैसा०॥२॥ येक तो ननंद हटेली दुजा ससरा नादान॥३॥ है मीरा दरसनकुं प्यासी। दरसन दिजोरे महाराज॥४॥
काना चालो मारा घेर कामछे / मीराबाई
काना चालो मारा घेर कामछे। सुंदर तारूं नामछे॥ध्रु०॥ मारा आंगनमों तुलसीनु झाड छे। राधा गौळण मारूं नामछे॥१॥ आगला मंदिरमा ससरा सुवेलाछे। पाछला मंदिर सामसुमछे॥२॥ मोर मुगुट पितांबर सोभे। गला मोतनकी मालछे॥३॥ मीराके प्रभु गिरिधर नागर। चरन कमल चित जायछे॥४॥
मैं तो तेरे भजन भरोसे अबिनासी / मीराबाई
मैं तो तेरे भजन भरोसे अबिनासी॥ मैतो०॥ध्रु०॥ तीरथ बरतते कछु नहीं कीनो। बन फिरे हैं उदासी॥ मैंतो० तेरे॥१॥ जंतर मंतर कछु नहीं जानूं। बेद पठो नहीं कासी॥ मैतो० तेरे॥२॥ मीराके प्रभु गिरिधर नागर। भई चरणकी दासी॥ मैतो० तेरे॥३॥
मोरी आंगनमों मुरली बजावेरे / मीराबाई
मोरी आंगनमों मुरली बजावेरे। खिलावना देवूंगी॥ध्रु०॥ नाच नाच मोरे मन मोहन। मधुर गीत सुनावुंगी॥२॥ मीरा कहे प्रभु गिरिधर नागर। हरिके चरन बल जाऊंगी॥३॥
बागनमों नंदलाल चलोरी / मीराबाई
बागनमों नंदलाल चलोरी॥ अहालिरी॥ध्रु॥ चंपा चमेली दवना मरवा। झूक आई टमडाल॥च०॥१॥ बागमों जाये दरसन पाये। बिच ठाडे मदन गोपाल॥च०॥२॥ मीराके प्रभू गिरिधर नागर। वांके नयन विसाल॥च०॥३॥
लाज रखो तुम मेरी प्रभूजी / मीराबाई
लाज रखो तुम मेरी प्रभूजी। लाज रखो तुम मेरी॥ध्रु०॥ जब बैरीने कबरी पकरी। तबही मान मरोरी॥ प्रभुजी०॥१॥ मैं गरीब तुम करुनासागर। दुष्ट करत बलजोरी॥ प्रभुजी०॥२॥ मीराके प्रभु गिरिधर नागर। तुम पिता मैं छोरी॥ प्रभुजी०॥३॥