Yadaram ‘Rasendra’ Archive

गड़बड़-घोटाला / यादराम ‘रसेंद्र’

कविता करने बैठा टिल्लू कागज-कलम संभाल, बस इतना ही लिख पाया था हम भारत के लाल। इतने में आ चढ़ा गोद में उसका कुत्ता काला, लुढ़क गई दावात, हो गया सब गड़बड़-घोटाला!

कसम राम की / यादराम ‘रसेंद्र’

दूध देखकर, आँख फाड़कर, बोली मेरी नानी, ‘अरे दूधिए, हद है भैया, दूध बनाा पानी।’ हाथ जोड़कर कहे दूधिया, ‘‘कसम राम की, मैया मैंने नहीं मिलाया, पानी अधिक पी गई गैया!’