Sangya Singh Archive

जियालाल / संज्ञा सिंह

जियालाल रास मंडल मानिक चौक (जौनपुर) का एक रिक्शा वाला है सुबह के साथ चौराहे पर होने की बात करता है वह रिक्शा खड़ा करके हर गुज़रते आदमी की निग़ाह पढ़ता है शाम होने पर थका-हारा जाता है अपनी झोपडी …

नमक / संज्ञा सिंह

बादलों धैर्य मत खोना अभी मेरे होंठों में नमी बरकरार है उमड़ते-घुमड़ते गरज़ते और दौड़ते रहना आँखों में झलक रहा है पानी अभी खाया हुआ नमक घुल रहा है रग-रग में संचरित हो रहा है ख़ून आँखें पठारी शक्ल अख़्तियार …