Gulzar Archive

काली काली / गुलज़ार

काली काली आँखों का काला काला जादू है आधा आधा तुझ बिन मैं आधी आधी सी तू है काली काली आँखों का काला काला जादू है आज भी जुनूनी सी जो एक आरज़ू है यूँ ही तरसने दे यह आँखें …

सपना रे सपना / गुलज़ार

सपना रे सपना, है कोई अपना अंखियों में आ भर जा अंखियों की डिबिया, भर दे रे निंदिया जादू से जादू कर जा सपना रे सपना, है कोई अपना अंखियों में आ भर जा ना सपना रे सपना, है कोई …

मेरा कुछ सामान / गुलज़ार

(1) जब भी यह दिल उदास होता है जाने कौन आस-पास होता है होंठ चुपचाप बोलते हों जब सांस कुछ तेज़-तेज़ चलती हो आंखें जब दे रही हों आवाज़ें ठंडी आहों में सांस जलती हो आँख में तैरती हैं तसवीरें …

न आने की आहट / गुलज़ार

न आने की आहट न जाने की टोह मिलती है कब आते हो कब जाते हो इमली का ये पेड़ हवा में हिलता है तो ईंटों की दीवार पे परछाई का छीटा पड़ता है और जज़्ब हो जाता है, जैसे …

खाली कागज़ पे क्या तलाश करते हो? / गुलज़ार

खाली कागज़ पे क्या तलाश करते हो? एक ख़ामोश-सा जवाब तो है। डाक से आया है तो कुछ कहा होगा “कोई वादा नहीं… लेकिन देखें कल वक्त क्या तहरीर करता है!” या कहा हो कि… “खाली हो चुकी हूँ मैं …

जगजीत: एक बौछार था वो… / गुलज़ार

एक बौछार था वो शख्स, बिना बरसे किसी अब्र की सहमी सी नमी से जो भिगो देता था… एक बोछार ही था वो, जो कभी धूप की अफशां भर के दूर तक, सुनते हुए चेहरों पे छिड़क देता था नीम …

अभी न पर्दा गिराओ, ठहरो / गुलज़ार

अभी न पर्दा गिराओ, ठहरो, कि दास्ताँ आगे और भी है अभी न पर्दा गिराओ, ठहरो! अभी तो टूटी है कच्ची मिट्टी, अभी तो बस जिस्म ही गिरे हैं अभी तो किरदार ही बुझे हैं अभी सुलगते हैं रूह के …

इक इमारत / गुलज़ार

इक इमारत है सराय शायद, जो मेरे सर में बसी है. सीढ़ियाँ चढ़ते-उतरते हुए जूतों की धमक, बजती है सर में कोनों-खुदरों में खड़े लोगों की सरगोशियाँ, सुनता हूँ कभी साज़िशें, पहने हुए काले लबादे सर तक, उड़ती हैं, भूतिया …

ख़ुदा / गुलज़ार

पूरे का पूरा आकाश घुमा कर बाज़ी देखी मैंने काले घर में सूरज रख के, तुमने शायद सोचा था, मेरे सब मोहरे पिट जायेंगे, मैंने एक चिराग़ जला कर, अपना रस्ता खोल लिया. तुमने एक समन्दर हाथ में ले कर, …

देखो, आहिस्ता चलो / गुलज़ार

देखो, आहिस्ता चलो, और भी आहिस्ता ज़रा देखना, सोच-सँभल कर ज़रा पाँव रखना, ज़ोर से बज न उठे पैरों की आवाज़ कहीं. काँच के ख़्वाब हैं बिखरे हुए तन्हाई में, ख़्वाब टूटे न कोई, जाग न जाये देखो, जाग जायेगा …