Hasrat Mohani Archive

ख़ू समझ में नहीं आती तेरे दीवानों की / हसरत मोहानी

ख़ू समझ में नहीं आती तेरे दीवानों की जिनको दामन की ख़बर है न गिरेबानों की आँख वाले तेरी सूरत पे मिटे जाते हैं शम‍अ़-महफ़िल की तरफ़ भीड़ है परवानों की राज़े-ग़म से हमें आगाह किया ख़ूब किया कुछ निहायत …

वो जब ये कहते हैं तुझ से ख़ता ज़रूर हुई / हसरत मोहानी

वो जब ये कहते हैं तुझ से ख़ता ज़रूर हुई मैं बे-क़सूर भी कह दूँ कि हाँ ज़रूर हुई नज़र को ताबे-तमाशाए-हुस्ने यार कहाँ ये इस ग़रीब को तम्बीहे-बेक़सूर हुई तुफ़ैले-इश्क है ‘हसरत’ ये सब मेरे नज़दीक तेरे कमाल की …