Hakim Nasir Archive

ऐ दोस्त कहीं तुझ पे भी इल्ज़ाम न आए / हकीम ‘नासिर’

ऐ दोस्त कहीं तुझ पे भी इल्ज़ाम न आए इस मेरी तबाही में तिरा नाम न आए ये दर्द है हम-दम उसी ज़ालिम की निशानी दे मुझ को दवा ऐसी कि आराम न आए काँधे पे उठाए हैं सितम राह-ए-वफा …

आँखों ने हाल कह दिया होंट न फिर हिला सके / हकीम ‘नासिर’

आँखों ने हाल कह दिया होंट न फिर हिला सके दिल में हज़ार ज़ख्म थे जो न उन्हें दिखा सके घर में जो इक चराग़ था तुम ने उसे बुझा दिया कोई कभी चराग़ हम घर में न फिर जला …