Bashar Nawaz Archive

अज़ल ता अबद / बशर नवाज़

उफ़ुक़-ता-उफ़ुक़ ये धुँदलके का आलम ये हद-ए-नज़र तक नम-आलूद सी रेत का नर्म क़ालीं कि जिस पर समुंदर की चंचल जवाँ बेटियों ने किसी नक़्श-ए-पा को भी न छोड़ा फ़ज़ा अपने दामन में बोझल ख़मोशी समेटे है लेकिन मचलती हुई …