यों लगे दोस्त तेरा मुझसे ख़फ़ा हो जाना जिस तरह फूल से ख़ुश्बू का जुदा हो जाना अहल-ए-दिल से ये तेरा तर्क-ए-त’अल्लुक़ वक़्त से पहले असीरों का रिहा हो जाना यों अगर हो तो जहाँ में कोई काफ़िर न रहे मो’अजुज़ा तेरे वादे का वफ़ा हो जाना ज़िन्दगी मैं भी चलूँगा तेरे पीछे-पीछे तू मेरे… Continue reading यों लगे दोस्त तेरा मुझसे ख़फ़ा हो जाना / क़तील
ये मोजज़ा भी मुहब्बत कभी दिखाये मुझे / क़तील
ये मोजज़ा भी मुहब्बत कभी दिखाये मुझे कि संग तुझपे गिरे और ज़ख़्म आये मुझे वो महरबाँ है तोप इक़रार क्यूँ नहीं करता वो बदगुमाँ है तो सौ बार आज़माये मुझे मैं अपने पाँव तले रौंदता हूँ साये को बदन मेरा ही सही दोपहर न भाये मुझे मैं घर से तेरी तमन्ना पहन के जब… Continue reading ये मोजज़ा भी मुहब्बत कभी दिखाये मुझे / क़तील
यारो किसी क़ातिल से कभी प्यार न माँगो / क़तील
यारो किसी क़ातिल से कभी प्यार न माँगो अपने ही गले के लिये तलवार न माँगो गिर जाओगे तुम अपने मसीहा की नज़र से मर कर भी इलाज-ए-दिल-ए-बीमार न माँगो खुल जायेगा इस तरह निगाहों का भरम भी काँटों से कभी फूल की महकार न माँगो सच बात पे मिलता है सदा ज़हर का प्याला… Continue reading यारो किसी क़ातिल से कभी प्यार न माँगो / क़तील
वो दिल ही क्या तेरे मिलने की जो दुआ न करे / क़तील
वो दिल ही क्या तेरे मिलने की जो दुआ न करे मैं तुझको भूल के ज़िंदा रहूँ ख़ुदा न करे रहेगा साथ तेरा प्यार ज़िन्दगी बनकर ये और बात मेरी ज़िन्दगी वफ़ा न करे ये ठीक है नहीं मरता कोई जुदाई में ख़ुदा किसी से किसी को मगर जुदा न करे सुना है उसको मोहब्बत… Continue reading वो दिल ही क्या तेरे मिलने की जो दुआ न करे / क़तील
वफ़ा के शीशमहल में सजा लिया मैनें / क़तील
वफ़ा के शीश महल में सजा लिया मैनें वो एक दिल जिसे पत्थर बना लिया मैनें ये सोच कर कि न हो ताक में ख़ुशी कोई ग़मों कि ओट में ख़ुद को छुपा लिया मैनें कभी न ख़त्म किया मैं ने रोशनी का मुहाज़ अगर चिराग़ बुझा, दिल जला लिया मैनें कमाल ये है कि… Continue reading वफ़ा के शीशमहल में सजा लिया मैनें / क़तील
उल्फ़त की नई मंज़िल को चला तू / क़तील
उल्फ़त की नई मंज़िल को चला, तू बाँहें डाल के बाँहों में दिल तोड़ने वाले देख के चल, हम भी तो पड़े हैं राहों में क्या क्या न जफ़ायेँ दिल पे सहीं, पर तुम से कोई शिकवा न किया इस जुर्म को भी शामिल कर लो, मेरे मासूम गुनाहों में जहाँ चाँदनी रातों में तुम… Continue reading उल्फ़त की नई मंज़िल को चला तू / क़तील
तुम्हारी अंजुमन से उठ के दीवाने कहाँ जाते / क़तील
तुम्हारी अंजुमन से उठ के दीवाने कहाँ जाते जो वाबस्ता हुए तुमसे वो अफ़साने कहाँ जाते निकल कर दैर-ओ-क़ाबा से अगर मिलता न मैख़ाना तो ठुकराए हुए इन्साँ ख़ुदा जाने कहाँ जाते तुम्हारी बेरुख़ी ने लाज रख ली [ithoughts_tooltip_glossary-tooltip content=”शराबख़ाने”]बादाख़ाने[/ithoughts_tooltip_glossary-tooltip] की तुम आँखों से पिला देते तो पैमाने कहाँ जाते चलो अच्छा हुआ काम आ… Continue reading तुम्हारी अंजुमन से उठ के दीवाने कहाँ जाते / क़तील
तूने ये फूल जो ज़ुल्फ़ों में लगा रखा है / क़तील
तूने ये फूल जो ज़ुल्फ़ों में लगा रखा है इक दिया है जो अँधेरों में जला रखा है जीत ले जाये कोई मुझको नसीबों वाला ज़िन्दगी ने मुझे दाँव पे लगा रखा है जाने कब आये कोई दिल में झाँकने वाला इस लिये मैंने ग़िरेबाँ को खुला रखा है इम्तेहाँ और मेरी ज़ब्त का तुम… Continue reading तूने ये फूल जो ज़ुल्फ़ों में लगा रखा है / क़तील
तुम पूछो और मैं ना बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं / क़तील
तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं किस को ख़बर थी साँवले बादल बिन बरसे उड़ जाते हैं सावन आया लेकिन अपनी क़िस्मत में बरसात नहीं माना जीवन में औरत एक बार मोहब्बत करती है लेकिन मुझको ये तो बता दे… Continue reading तुम पूछो और मैं ना बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं / क़तील
शाम के साँवले चेहरे को निखारा जाये / क़तील
शाम के साँवले चेहरे को निखारा जाये क्यों न सागर से कोई चाँद उभारा जाये रास आया नहीं तस्कीं का साहिल कोई फिर मुझे प्यास के दरिया में उतारा जाये मेहरबाँ तेरी नज़र, तेरी अदायें क़ातिल तुझको किस नाम से ऐ दोस्त पुकारा जाये मुझको डर है तेरे वादे पे भरोसा करके मुफ़्त में ये… Continue reading शाम के साँवले चेहरे को निखारा जाये / क़तील