1. छैल बिराणे लाख को हे अपणे काज न होइ। ताके संग सीधारतां हे, भला न कहसी कोइ। वर हीणों आपणों भलो हे, कोढी कुष्टि कोइ। जाके संग सीधारतां है, भला कहै सब लोइ। अबिनासी सूं बालवां हे, जिपसूं सांची प्रीत। मीरा कूं प्रभु मिल्या हे, ऐहि भगति की रीत॥ 2. डर गयोरी मन मोहनपास,… Continue reading पदावली / भाग-5 / मीराबाई
पदावली / भाग-4 / मीराबाई
1. स्याम! मने चाकर राखो जी गिरधारी लाला! चाकर राखो जी। चाकर रहसूं बाग लगासूं नित उठ दरसण पासूं। ब्रिंदाबन की कुंजगलिन में तेरी लीला गासूं।। चाकरी में दरसण पाऊँ सुमिरण पाऊँ खरची। भाव भगति जागीरी पाऊँ, तीनूं बाता सरसी।। मोर मुकुट पीताम्बर सोहै, गल बैजंती माला। ब्रिंदाबन में धेनु चरावे मोहन मुरलीवाला।। हरे हरे… Continue reading पदावली / भाग-4 / मीराबाई
पदावली / भाग-3 / मीराबाई
1. कालोकी रेन बिहारी। महाराज कोण बिलमायो॥ध्रु०॥ काल गया ज्यां जाहो बिहारी। अही तोही कौन बुलायो॥१॥ कोनकी दासी काजल सार्यो। कोन तने रंग रमायो॥२॥ कंसकी दासी काजल सार्यो। उन मोहि रंग रमायो॥३॥ मीरा कहे प्रभु गिरिधर नागर। कपटी कपट चलायो॥४॥ 2. किन्ने देखा कन्हया प्यारा की मुरलीवाला॥ध्रु०॥ जमुनाके नीर गंवा चरावे। खांदे कंबरिया काला॥१॥ मोर… Continue reading पदावली / भाग-3 / मीराबाई
पदावली / भाग-2 / मीराबाई
1. आतुर थई छुं सुख जोवांने घेर आवो नंद लालारे॥ध्रु०॥ गौतणां मीस करी गयाछो गोकुळ आवो मारा बालारे॥१॥ मासीरे मारीने गुणका तारी टेव तमारी ऐसी छोगळारे॥२॥ कंस मारी मातपिता उगार्या घणा कपटी नथी भोळारे॥३॥ मीरा कहे प्रभू गिरिधर नागर गुण घणाज लागे प्यारारे॥४॥ 2. राम मिलण के काज सखी, मेरे आरति उर में जागी री।… Continue reading पदावली / भाग-2 / मीराबाई
पदावली / भाग-1 / मीराबाई
1. शबरी प्रसंग अच्छे मीठे फल चाख चाख, बेर लाई भीलणी। ऎसी कहा अचारवती, रूप नहीं एक रती। नीचे कुल ओछी जात, अति ही कुचीलणी। जूठे फल लीन्हे राम, प्रेम की प्रतीत त्राण। उँच नीच जाने नहीं, रस की रसीलणी। ऎसी कहा वेद पढी, छिन में विमाण चढी। हरि जू सू बाँध्यो हेत, बैकुण्ठ में… Continue reading पदावली / भाग-1 / मीराबाई
मेमने ने देखे जब गैया के आंसू / अशोक चक्रधर
(खेल में मग्न बच्चों को घर की सुध नहीं रहती) माता पिता से मिला जब उसको प्रेम ना, तो बाड़े से भाग लिया नन्हा सा मेमना। बिना रुके बढ़ता गया, बढ़ता गया भू पर, पहाड़ पर चढ़ता गया, चढ़ता गया ऊपर। बहुत दूर जाके दिखा, उसे एक बछड़ा, बछड़ा भी अकड़ गया, मेमना भी अकड़ा।… Continue reading मेमने ने देखे जब गैया के आंसू / अशोक चक्रधर
आलपिन कांड / अशोक चक्रधर
बंधुओ, उस बढ़ई ने चक्कू तो ख़ैर नहीं लगाया पर आलपिनें लगाने से बाज़ नहीं आया। ऊपर चिकनी-चिकनी रैक्सीन अंदर ढेर सारे आलपीन। तैयार कुर्सी नेताजी से पहले दफ़्तर में आ गई, नेताजी आए तो देखते ही भा गई। और, बैठने से पहले एक ठसक, एक शान के साथ मुस्कान बिखेरते हुए उन्होंने टोपी संभालकर… Continue reading आलपिन कांड / अशोक चक्रधर
हम तो करेंगे / अशोक चक्रधर
हम तो करेंगे गुनह करेंगे पुनह करेंगे। वजह नहीं बेवजह करेंगे। कल से ही लो कलह करेंगे। जज़्बातों को जिबह करेंगे निर्लज्जों से निबह करेंगे सुलगाने को सुलह करेंगे। हम ज़ालिम क्यों जिरह करेंगे संबंधों में गिरह करेंगे रस विशेष में विरह करेंगे जो हो, अपनी तरह करेंगे रात में चूके सुबह करेंगे गुनह करेंगे… Continue reading हम तो करेंगे / अशोक चक्रधर
जंगल गाथा / अशोक चक्रधर
1. एक नन्हा मेमना और उसकी माँ बकरी, जा रहे थे जंगल में राह थी संकरी। अचानक सामने से आ गया एक शेर, लेकिन अब तो हो चुकी थी बहुत देर। भागने का नहीं था कोई भी रास्ता, बकरी और मेमने की हालत खस्ता। उधर शेर के कदम धरती नापें, इधर ये दोनों थर-थर कापें।… Continue reading जंगल गाथा / अशोक चक्रधर
पोल-खोलक यंत्र / अशोक चक्रधर
ठोकर खाकर हमने जैसे ही यंत्र को उठाया, मस्तक में शूं-शूं की ध्वनि हुई कुछ घरघराया। झटके से गरदन घुमाई, पत्नी को देखा अब यंत्र से पत्नी की आवाज़ आई- मैं तो भर पाई! सड़क पर चलने तक का तरीक़ा नहीं आता, कोई भी मैनर या सली़क़ा नहीं आता। बीवी साथ है यह तक भूल… Continue reading पोल-खोलक यंत्र / अशोक चक्रधर