राम मिलण के काज सखी मेरे आरति उर में जागी री। तड़पत-तड़पत कल न परत है बिरहबाण उर लागी री। निसदिन पंथ निहारूं पिवको पलक न पल भर लागी री। पीव-पीव मैं रटूं रात-दिन दूजी सुध-बुध भागी री। बिरह भुजंग मेरो डस्यो कलेजो लहर हलाहल जागी री। री आरति मेटि गोसाईं आय मिलौ मोहि सागी… Continue reading राम मिलण के काज सखी मेरे आरति उर में जागी री / मीराबाई
मैं तो सांवरे के रंग राची / मीराबाई
मैं तो सांवरे के रंग राची। साजि सिंगार बांधि पग घुंघरू लोक-लाज तजि नाची॥ ग कुमति ल साधुकी संगति भगत रूप भै सांची। गाय गाय हरिके गुण निस दिन कालब्यालसूं बांची॥ उण बिन सब जग खारो लागत और बात सब कांची। मीरा श्रीगिरधरन लालसूं भगति रसीली जांची॥
बाला मैं बैरागण हूंगी / मीराबाई
बाला मैं बैरागण हूंगी। जिन भेषां म्हारो साहिब रीझे सोही भेष धरूंगी। सील संतोष धरूं घट भीतर समता पकड़ रहूंगी। जाको नाम निरंजन कहिये ताको ध्यान धरूंगी। गुरुके ग्यान रंगू तन कपड़ा मन मुद्रा पैरूंगी। प्रेम पीतसूं हरिगुण गाऊं चरणन लिपट रहूंगी। या तन की मैं करूं कीगरी रसना नाम कहूंगी। मीरा के प्रभु गिरधर… Continue reading बाला मैं बैरागण हूंगी / मीराबाई
जागो बंसीवारे जागो मोरे ललन / मीराबाई
जागो बंसीवारे जागो मोरे ललन। रजनी बीती भोर भयो है घर घर खुले किवारे। जागो बंसीवारे जागो मोरे ललन॥ गोपी दही मथत सुनियत है कंगना के झनकारे। जागो बंसीवारे जागो मोरे ललन॥ उठो लालजी भोर भयो है सुर नर ठाढ़े द्वारे। जागो बंसीवारे जागो मोरे ललन। ग्वाल बाल सब करत कुलाहल जय जय सबद उचारे।… Continue reading जागो बंसीवारे जागो मोरे ललन / मीराबाई
तनक हरि चितवौ जी मोरी ओर / मीराबाई
तनक हरि चितवौ जी मोरी ओर। हम चितवत तुम चितवत नाहीं मन के बड़े कठोर। मेरे आसा चितनि तुम्हरी और न दूजी ठौर। तुमसे हमकूं एक हो जी हम-सी लाख करोर॥ कब की ठाड़ी अरज करत हूं अरज करत भै भोर। मीरा के प्रभु हरि अबिनासी देस्यूं प्राण अकोर॥
हरि मेरे जीवन प्राण अधार / मीराबाई
हरि मेरे जीवन प्राण अधार। और आसरो नांही तुम बिन तीनूं लोक मंझार॥ हरि मेरे जीवन प्राण अधार आपबिना मोहि कछु न सुहावै निरख्यौ सब संसार। हरि मेरे जीवन प्राण अधार मीरा कहैं मैं दासि रावरी दीज्यो मती बिसार॥ हरि मेरे जीवन प्राण अधार
म्हारे घर होता जाज्यो राज / मीराबाई
म्हारे घर होता जाज्यो राज। अबके जिन टाला दे जा सिर पर राखूं बिराज॥ म्हे तो जनम जनमकी दासी थे म्हांका सिरताज। पावणड़ा म्हांके भलां ही पधार, ह्या सब ही सुघारण काज॥ म्हे तो बुरी छां थांके भली छै घणेरी तुम हो एक रसराज। थांने हम सब ही की चिंता, तुम सबके हो गरीब निवाज॥… Continue reading म्हारे घर होता जाज्यो राज / मीराबाई
प्रभुजी मैं अरज करुं छूं म्हारो बेड़ो लगाज्यो पार / मीराबाई
प्रभुजी मैं अरज करुं छूं म्हारो बेड़ो लगाज्यो पार॥ इण भव में मैं दुख बहु पायो संसा-सोग निवार। अष्ट करम की तलब लगी है दूर करो दुख-भार॥ यों संसार सब बह्यो जात है लख चौरासी री धार। मीरा के प्रभु गिरधर नागर आवागमन निवार॥
प्यारे दरसन दीज्यो आय तुम बिन रह्यो न जाय / मीराबाई
प्यारे दरसन दीज्यो आय तुम बिन रह्यो न जाय॥ जल बिन कमल चंद बिन रजनी ऐसे तुम देख्यां बिन सजनी। आकुल व्याकुल फिरूं रैन दिन बिरह कालजो खाय॥ दिवस न भूख नींद नहिं रैना मुख सूं कथत न आवे बैना। कहा कहूं कछु कहत न आवै मिलकर तपत बुझाय॥ क्यूं तरसावो अन्तरजामी आय मिलो किरपाकर… Continue reading प्यारे दरसन दीज्यो आय तुम बिन रह्यो न जाय / मीराबाई
आली रे मेरे नैणा बाण पड़ी / मीराबाई
आली रे मेरे नैणा बाण पड़ी। चित्त चढ़ो मेरे माधुरी मूरत उर बिच आन अड़ी। कब की ठाढ़ी पंथ निहारूं अपने भवन खड़ी॥ कैसे प्राण पिया बिन राखूं जीवन मूल जड़ी। मीरा गिरधर हाथ बिकानी लोग कहै बिगड़ी॥