Shakeel Badayuni Archive

ग़मे-आशिक़ी से कह दो / शकील बँदायूनी

ग़मे-आशिक़ी से कह दो रहे–आम तक न पहुँचे । मुझे ख़ौफ़ है ये तोहमत मेरे नाम तक न पहुँचे ।। मैं नज़र से पी रहा था कि ये दिल ने बददुआ दी – तेरा हाथ ज़िंदगी-भर कभी जाम तक न …

सुब्ह का अफ़साना कहकर शाम से / शकील बँदायूनी

सुब्ह का अफ़साना कहकर शाम से खेलता हूं गर्दिशे-आय्यामसे उनकी याद उनकी तमन्ना, उनका ग़म कट रही है ज़िन्दगी आराम से इश्क़ में आएंगी वो भी साअ़तें काम निकलेगा दिले-नाकाम से लाख मैं दीवाना-ओ-रूसवा सही फिर भी इक निस्बत है …