Qabil Ajmeri Archive

दिल-ए-दीवाना अर्ज़-ए-हाल पर माइल तो क्या होगा / ‘क़ाबिल’ अजमेरी

दिल-ए-दीवाना अर्ज़-ए-हाल पर माइल तो क्या होगा मगर वो पूछे बैठे खुद ही हाल-ए-दिल क्या होगा हमारा क्या हमें तो डूबना है डूब जाएँगे मगर तूफान जा पहुँचा लब-ए-साहिल तो क्या होगा शराब-ए-नाब ही से होश उड़ जाते है इन्सां …

तुम्हें जो मेरे गम-ए-दिल से आगाही हो जाए / ‘क़ाबिल’ अजमेरी

तुम्हें जो मेरे गम-ए-दिल से आगाही हो जाए जिगर में फूल खिलें आँख शबनमी हो जा अजला भी उस की बुलंदी को छू नहीं सकती वो जिंदगी जिसे एहसास-ए-जिंदगी हो जाए यही है दिल की हलाकत यही है इश्क की …