राम राइ अबिगत बिगति न जानै, कहि किम तोहिं रूप बषानै॥टेक॥ प्रथमे गगन कि पुहमि प्रथमे प्रभू पवन कि पाँणीं। प्रथमे चंद कि सूर प्रथमे प्रभू, प्रथमे कौन बिनाँणीं॥ प्रथमे प्राँण कि प्यंड प्रथमे प्रभू, प्रथमे रकत कि रेत। प्रथमे पुरिष की नारि प्रथमे प्रभू, प्रथमे बीज की खेत॥ प्रथमे दिवस कि रैणि प्रथमे प्रभू,… Continue reading राग रामकली / पृष्ठ – २ / पद / कबीर
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राग रामकली / पृष्ठ – १ / पद / कबीर
जगत गुर अनहद कींगरी बाजे, तहाँ दीरघ नाद ल्यौ लागे॥टेक॥ त्री अस्यान अंतर मृगछाला, गगन मंडल सींगी बाजे॥ तहुँआँ एक दुकाँन रच्यो हैं, निराकार ब्रत साजे॥ गगन ही माठी सींगी करि चुंगी, कनक कलस एक पावा। तहुँवा चबे अमृत रस नीझर, रस ही मैं रस चुवावा॥ अब तौ एक अनूपम बात भई, पवन पियाला साजा।… Continue reading राग रामकली / पृष्ठ – १ / पद / कबीर
राग गौड़ी / पृष्ठ – १५ / पद / कबीर
कहौ भइया अंबर काँसूँ लागा, कोई जाँणँगा जाँननहारा॥टेक॥ अंबरि दीसे केता तारा कौन चतुर ऐसा चितवनहारा॥ जे तुम्ह देखौ सो यहु नाँही, यहु पद अगम अगोचर माँही॥ तीनि हाथ एक अरधाई, ऐसा अंबर चीन्हौ रे भाई॥ कहै कबीर जे अंबर जाने, ताही सूँ मेरा मन माँनै॥141॥ तन खोजौ नर करौ बड़ाई, जुगति बिना भगति किनि… Continue reading राग गौड़ी / पृष्ठ – १५ / पद / कबीर
राग गौड़ी / पृष्ठ – १४ / पद / कबीर
राम न जपहु कहा भयौ अंधा राम बिना जँम मैले फंधा॥टेक॥ सुत दारा का किया पसारा, अंत की बेर भये बटपारा॥ माया ऊपरि माया माड़ी, साथ न चले षोषरी हाँड़ा॥ जपौ राम ज्यूँ अंति उबारै, ठाढ़ी बाँह कबीर पुकारै॥128॥ डगमग छाड़ि दै मन बौरा। अब तौ जरें बरें बनि आवै, लीन्हों हाथ सिंधौरा॥टेक॥ होइ निसंक… Continue reading राग गौड़ी / पृष्ठ – १४ / पद / कबीर
राग गौड़ी / पृष्ठ – १३ / पद / कबीर
गोब्यंदा गुँण गाईये रे, ताथैं भाई पाईये परम निधान॥टेक॥ ऊंकारे जग ऊपजै, बिकारे जग जाइ। अनहद बेन बजाइ करि रह्यों गगन मठ छाइ॥ झूठै जग डहकाइया रे क्या जीवण की आस। राम रसाँइण जिनि पीया, तिनकैं बहुरि न लागी रे पियास॥ अरघ षिन जीवन भला, भगवत भगति सहेत। कोटि कलप जीवन ब्रिथा, नाँहिन हरि सूँ… Continue reading राग गौड़ी / पृष्ठ – १३ / पद / कबीर
राग गौड़ी / पृष्ठ – १२ / पद / कबीर
हरि जननी मैं बालिक तेरा, काहे न औगुण बकसहु मेरा॥टेक॥ सुत अपराध करै दिन केते, जननी कै चित रहै न तेते॥ कर गहि केस करे जौ घाता, तऊ न हेत उतारै माता॥ कहैं कबीर एक बुधि बिचारी, बालक दुखी दुखी महतारी॥111॥ गोब्यदें तुम्ह थैं डरपौं भारी, सरणाई आयौ क्यूँ गहिये, यहु कौन बात तुम्हारी॥टेक॥ धूप… Continue reading राग गौड़ी / पृष्ठ – १२ / पद / कबीर
राग गौड़ी / पृष्ठ – ११ / पद / कबीर
माया का रस षाण न पावा, तह लग जम बिलवा ह्नै धावा॥टेक॥ अनेक जतन करि गाड़ि दुराई, काहू साँची काहू खाई॥ तिल तिल करि यहु माया जोरी, चलति बेर तिणाँ ज्यूँ तासी॥ कहै कबीर हूँ ताँका दास, माया माँहैं रहैं उदास॥101॥ मेरी मेरी दुनिया करते, मोह मछर तन धरते, आगै पीर मुकदम होते, वै भी… Continue reading राग गौड़ी / पृष्ठ – ११ / पद / कबीर
राग गौड़ी / पृष्ठ – १० / पद / कबीर
बिनसि जाइ कागद की गुड़िया, जब लग पवन तबै उग उड़िया॥टेक॥ गुड़िया कौ सबद अनाहद बोलै, खसम लियै कर डोरी डोलै॥ पवन थक्यो गुड़िया ठहरानी, सीस धनै धुनि रोवै प्राँनी। कहै कबीर भजि सारँगपानी, नाहीं तर ह्नैहै खैंचा तानी॥91॥ मन रे तन कागद का पुतला। लागै बूँद बिनसि जाइ छिन में, गरब कर क्या इतना॥टेक॥… Continue reading राग गौड़ी / पृष्ठ – १० / पद / कबीर
राग गौड़ी / पृष्ठ – ९ / पद / कबीर
माई रे चूँन बिलूँटा खाई, वाघनि संगि भई सबहिन कै, खसम न भेद लहाई॥टेक॥ सब घर फोरि बिलूँटा खायौ, कोई न जानैं भेव। खसम निपूतौ आँगणि सूतौ, राँड न देई लेव॥ पाडोसनि पनि भई बिराँनी, माँहि हुई घर घालै। पंच सखी मिलि मंगल गाँवैं, यह दुख याकौं सालै॥ द्वै द्वै दीपक धरि धरि जोया, मंदिर… Continue reading राग गौड़ी / पृष्ठ – ९ / पद / कबीर
राग गौड़ी / पृष्ठ – ८ / पद / कबीर
कोई पीवै रे रस राम नाम का, जो पीवै सो जोगी रे। संतौ सेवा करौ राम की, और न दूजा भोगी रे॥टेक॥ यहु रस तौ सब फीका भया, ब्रह्म अगनि परजारी रे। ईश्वर गौरी पीवन लागे, राँम तनीं मतिवारी रे॥ चंद सूर दोइ भाठी कीन्ही सुषमनि चिगवा लागी रे। अंमृत कूँ पी साँचा पुरया, मेरी… Continue reading राग गौड़ी / पृष्ठ – ८ / पद / कबीर