राग सूहौ / रमैणी / कबीर

तू सकल गहगरा, सफ सफा दिलदार दीदार॥ तेरी कुदरति किनहूँ न जानी, पीर मुरीद काजी मुसलमानी॥ देवौ देव सुर नर गण गंध्रप, ब्रह्मा देव महेसुर॥ तेरी कुदरति तिनहूँ न जांनी॥टेक॥ काजी सो जो काया बिचारै, तेल दीप मैं बाती जारै॥ तेल दीप मैं बाती रहे, जोति चीन्हि जे काजी कहै॥ मुलनां बंग देइ सुर जाँनी,… Continue reading राग सूहौ / रमैणी / कबीर

राग धनाश्री / पद / कबीर

जपि जपि रे जीयरा गोब्यंदो, हित चित परमांनंदौ रे। बिरही जन कौ बाल हौ, सब सुख आनंदकंदौ रे॥टेक॥ धन धन झीखत धन गयौ, सो धन मिल्यौ न आये रे॥ ज्यूँ बन फूली मालती, जन्म अबिरथा जाये रे॥ प्रांणी प्रीति न कीजिये, इहि झूठे संसारी रे॥ धूंवां केरा धौलहर जात न लागै बारी रे॥ माटी केरा… Continue reading राग धनाश्री / पद / कबीर

राग मलार / पद / कबीर

जतन बिन मृगनि खेत उजारे, टारे टरत नहीं निस बासुरि, बिडरत नहीं बिडारे॥टेक॥ अपने अपने रस के लोभी, करतब न्यारे न्यारे। अति अभिमान बदत नहीं काहू, बहुत लोग पचि हारे॥ बुधि मेरी फिरषी गुर मेरौ बिझुका, आखिर दोइ रखवारे॥ कहै कबीर अब खान न दैहूँ, बरियां भली सँभारे॥396॥ हरि गुन सुमरि रे नर प्राणी। जतन… Continue reading राग मलार / पद / कबीर

राग सारंग / पद / कबीर

यहु ठग ठगत सकल जग डोलै, गवन करै तब मुषह न बोलै॥ तूँ मेरो पुरिषा हौं तेरी नारी, तुम्ह चलतैं पाथर थैं भारी। बालपनाँ के मीत हमारे, हमहिं लाडि कत चले हो निनारे॥ हम सूँ प्रीति न करि री बौरी, तुमसे केते लागे ढौरी॥ हम काहू संगि गए न आये, तुम्ह से गढ़ हम बहुत… Continue reading राग सारंग / पद / कबीर

राग कल्याण / पद / कबीर

ऐसै मन लाइ लै राम रसनाँ, कपट भगति कीजै कौन गुणाँ॥टेक॥ ज्यूँ मृग नादैं बध्यौ जाइ, प्यंड परे बाकौ ध्याँन न जाइ। ज्यूँ जल मीन तेत कर जांनि, प्रांन तजै बिसरै नहीं बानि॥ भ्रिगी कीट रहै ल्यौ लाइ, ह्नै लोलीन भिंरग ह्नै जाइ॥ राम नाम निज अमृत सार, सुमिरि सुमिरि जन उतरे पार॥ कहै कबीर… Continue reading राग कल्याण / पद / कबीर

राग माली गौड़ी / पद / कबीर

पंडिता मन रंजिता, भगति हेत त्यौ लाइ लाइ रे॥ प्रेम प्रीति गोपाल भजि नर, और कारण जाइ रे॥टेक॥ दाँम छै पणि कांम नाहीं, ग्याँन छै पणि अंध रे॥ श्रवण छै पणि सुरत नाहीं, नैन छै पणि अंध रे॥ जाके नाभि पदक सूँ उदित ब्रह्मा, चरन गंग तरंग रे॥ कहै कबीर हरि भगति बांछू जगत गुर… Continue reading राग माली गौड़ी / पद / कबीर

राग बसंत / पद / कबीर

सो जोगी जाकै सहज भाइ, अकल प्रीति की भीख खाइ॥टेक॥ सबद अनाहद सींगी नाद, काम क्रोध विषया न बाद। मन मुद्रा जाकै गुर को ग्यांन, त्रिकुट कोट मैं धरत ध्यान॥ मनहीं करन कौं करै सनांन, गुर को सबद ले ले धरै धियांन। काया कासी खोजै बास, तहाँ जोति सरूप भयौ परकास॥ ग्यांन मेषली सहज भाइ,… Continue reading राग बसंत / पद / कबीर

राग ललित / पद / कबीर

राम ऐसो ही जांनि जपी नरहरी, माधव मदसूदन बनवारी॥टेक॥ अनुदिन ग्यान कथै घरियार, धूवं धौलह रहै संसार। जैसे नदी नाव करि संग, ऐसै ही मात पिता सुत अंग॥ सबहि नल दुल मलफ लकीर, जल बुदबुदा ऐसा आहि सरीर। जिभ्या राम नाम अभ्यास, कहौ कबीर तजि गरम बास॥374॥ रसनां राम गुन रिस रस पीजै, गुन अतीत… Continue reading राग ललित / पद / कबीर

राग बिलावल / पद / कबीर

बार बार हरि का गुण गावै, गुर गमि भेद सहर का पावै॥टेक॥ आदित करै भगति आरंभ, काया मंदिर मनसा थंभ। अखंड अहनिसि सुरष्या जाइ, अनहद बेन सहज मैं पाइ॥ सोमवार ससि अमृत झरे, चाखत बेगि तपै निसतरै॥ बाँधी रोक्याँ रहै दुवार, मन मतिवाला पीवनहार॥ मंगलवार ल्यौ मांहीत, पंच लोक की छाड़ौ रीत॥ घर छाँड़ै जिनि… Continue reading राग बिलावल / पद / कबीर

राग भैरूँ / पृष्ठ – ४ / पद / कबीर

ताथैं, कहिये लोकोचार, बेद कतेब कथैं ब्योहार॥टेक॥ जारि बारि करि आवै देहा, मूंवां पीछै प्रीति सनेहा। जीवन पित्राहि गारहि डंगा, मूंवां पित्रा ले घालैं गंगा॥ जीवत पित्रा कूँ अन न ख्वावै, मूंवां पीछे ष्यंड भरावै॥ जीवत पित्रा कूँ बोलै अपराध, मूंवां पीछे देहि सराध॥ कहि कबीर मोहि अचिरज आवै, कउवा खाइ पित्रा क्यूँ पावै॥356॥ बाप… Continue reading राग भैरूँ / पृष्ठ – ४ / पद / कबीर