Hridyesh Archive

खेल-सियासत / हृदयेश

यह कैसी शतरंज बिछी है, जिसपर खड़े पियादे-से हम खेल-खेल में पिट जाते हैं, कितने सीधे-सादे-से हम । बिना मोल मोहरे बनें हम खड़े हुए हैं यहाँ भीड़ में ऐसी क्या है मज़बूरी जो बँधे प्राण राजा-वजीर में फलक-विहीन किसी …

मन बहुत है / हृदयेश

आज तपती रेत पर कुछ छंद लहरों के लिखें हम समय के अतिरेक को हम साथ ले अपने स्वरों में मन बहुत है ! कस रहे गुंजलक से ये सुबह के पल बहुत भारी अनय को देता समर्थन दिवस यह …