Hassan Naeem Archive

हुस्न के सेहर ओ करामात से जी डरता है / हसन ‘नईम’

हुस्न के सेहर ओ करामात से जी डरता है इश्‍क़ की ज़िंदा रिवायात से जी डरता है मैं ने माना कि मुझे उन से मोहब्बत न रही हम-नशीं फिर भी मुलाक़ात से जी डरता है सच तो ये कि अभी …

ग़म से बिखरा न पैमाल हुआ / हसन ‘नईम’

ग़म से बिखरा न पैमाल हुआ मैं तो ग़म से ही बे-मिसाल हुआ वक़्त गुज़रा तो मौजा-ए-गुल था वक़्त ठहरा तो माह ओ साल हुआ हम गए जिस शजर के साए में उस के गिरने का एहतिमाल हुआ बस कि …