Harish Karamchandani Archive

पल पल मन / हरीश करमचंदाणी

एक दिन सुख मेरे पास दबे पांव आया उस समय मैं सो रहा था दुखो से घिरा था मैं बड़ी मुश्किल से बहुत देर से आई थी नींद मैं झुंझलाया हुई भारी कोफ्त झिड़क ही दिया उसे और वह भी …