Hariom Rajoria Archive

ऐनक / हरिओम राजोरिया

घर में रहता तो आता किस काम इसलिए चला आया यह भी बुढ़िया की अन्तिम यात्रा में सिर के पास आँटी से अटका चल रहा है अरथी में साथ-साथ याद दिलाता हुआ उस स्त्री की जो कुछ घण्टे पहले निखन्नी …

आम / हरिओम राजोरिया

असमय हवा के थपेड़ों से झड़ गये आम अपने बोझ से नहीं झड़े समय की मार से बेमौसम अप्रैल की हवाओं ने एक घर भर दिया कच्चे आमों से आम न हों जैसे भगदड़ में मारे गये शव हों मासूम …