कोई कहियौ रे प्रभु आवन की, आवनकी मनभावन की। आप न आवै लिख नहिं भेजै , बाण पड़ी ललचावन की। ए दोउ नैण कह्यो नहिं मानै, नदियां बहै जैसे सावन की। कहा करूं कछु नहिं बस मेरो, पांख नहीं उड़ जावनकी। मीरा कहै प्रभु कब रे मिलोगे, चेरी भै हूँ तेरे दांवन की।
राखौ कृपानिधान / मीराबाई
अब मैं सरण तिहारी जी, मोहि राखौ कृपा निधान। अजामील अपराधी तारे, तारे नीच सदान। जल डूबत गजराज उबारे, गणिका चढ़ी बिमान। और अधम तारे बहुतेरे, भाखत संत सुजान। कुबजा नीच भीलणी तारी, जाणे सकल जहान। कहं लग कहूँ गिणत नहिं आवै, थकि रहे बेद पुरान। मीरा दासी शरण तिहारी, सुनिये दोनों कान।
मेरो दरद न जाणै कोय / मीराबाई
हे री मैं तो प्रेम-दिवानी मेरो दरद न जाणै कोय। घायल की गति घायल जाणै, जो कोई घायल होय। जौहरि की गति जौहरी जाणै, की जिन जौहर होय। सूली ऊपर सेज हमारी, सोवण किस बिध होय। गगन मंडल पर सेज पिया की किस बिध मिलणा होय। दरद की मारी बन-बन डोलूँ बैद मिल्या नहिं कोय।… Continue reading मेरो दरद न जाणै कोय / मीराबाई
म्हारो अरजी / मीराबाई
तुम सुणो जी म्हारो अरजी। भवसागर में बही जात हूँ काढ़ो तो थारी मरजी। इण संसार सगो नहिं कोई सांचा सगा रघुबरजी।। मात-पिता और कुटम कबीलो सब मतलब के गरजी। मीरा की प्रभु अरजी सुण लो चरण लगावो थारी मरजी।।
हरो जन की भीर / मीराबाई
हरि तुम हरो जन की भीर। द्रोपदी की लाज राखी, चट बढ़ायो चीर।। भगत कारण रूप नर हरि, धरयो आप समीर।। हिरण्याकुस को मारि लीन्हो, धरयो नाहिन धीर।। बूड़तो गजराज राख्यो, कियौ बाहर नीर।। दासी मीरा लाल गिरधर, चरणकंवल सीर।।
तुम बिन नैण दुखारा / मीराबाई
म्हारे घर आओ प्रीतम प्यारा।। तन मन धन सब भेंट धरूंगी भजन करूंगी तुम्हारा। म्हारे घर आओ प्रीतम प्यारा।। तुम गुणवंत सुसाहिब कहिये मोमें औगुण सारा।। म्हारे घर आओ प्रीतम प्यारा।। मैं निगुणी कछु गुण नहिं जानूं तुम सा बगसणहारा।। म्हारे घर आओ प्रीतम प्यारा।। मीरा कहै प्रभु कब रे मिलोगे तुम बिन नैण दुखारा।।… Continue reading तुम बिन नैण दुखारा / मीराबाई
प्रभु कब रे मिलोगे / मीराबाई
प्रभु जी तुम दर्शन बिन मोय घड़ी चैन नहीं आवड़े।।टेक।। अन्न नहीं भावे नींद न आवे विरह सतावे मोय। घायल ज्यूं घूमूं खड़ी रे म्हारो दर्द न जाने कोय।।१।। दिन तो खाय गमायो री, रैन गमाई सोय। प्राण गंवाया झूरता रे, नैन गंवाया दोनु रोय।।२।। जो मैं ऐसा जानती रे, प्रीत कियाँ दुख होय। नगर… Continue reading प्रभु कब रे मिलोगे / मीराबाई
मन रे पासि हरि के चरन / मीराबाई
मन रे पासि हरि के चरन। सुभग सीतल कमल- कोमल त्रिविध – ज्वाला- हरन। जो चरन प्रह्मलाद परसे इंद्र- पद्वी- हान।। जिन चरन ध्रुव अटल कींन्हों राखि अपनी सरन। जिन चरन ब्राह्मांड मेंथ्यों नखसिखौ श्री भरन।। जिन चरन प्रभु परस लनिहों तरी गौतम धरनि। जिन चरन धरथो गोबरधन गरब- मधवा- हरन।। दास मीरा लाल गिरधर… Continue reading मन रे पासि हरि के चरन / मीराबाई
हेरी म्हा दरद दिवाणौ / मीराबाई
हेरी म्हा दरद दिवाणौ म्हारा दरद ना जाण्याँ कोय । घायल री गत घायल जाण्याँ हिबडो अगण संजोय ॥ जौहर की गत जौहरी जाणै क्या जाण्याँ जण खोय मीरा री प्रभु पीर मिटाँगा जब वैद साँवरो होय ॥
बरसै बदरिया सावन की / मीराबाई
बरसै बदरिया सावन की, सावन की मनभावन की । सावन में उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुनी हरि आवन की ॥ उमड घुमड चहुं दिस से आयो, दामण दमके झर लावन की । नान्हीं नान्हीं बूंदन मेहा बरसै, सीतल पवन सुहावन की ॥ मीरा के प्रभु गिरघर नागर, आनन्द मंगल गावन की ॥