राणोजी रूठे तो म्हारो कांई करसी, म्हे तो गोविन्दरा गुण गास्याँ हे माय।। राणोजी रूठे तो अपने देश रखासी, म्हे तो हरि रूठ्यां रूठे जास्याँ हे माय। लोक-लाजकी काण न राखाँ, म्हे तो निर्भय निशान गुरास्याँ हे माय। राम नाम की जहाज चलास्याँ, म्हे तो भवसागर तिर जास्याँ हे माय। हरिमंदिर में निरत करास्याM, म्हे… Continue reading म्हारो कांई करसी / मीराबाई
सुभ है आज घरी / मीराबाई
तेरो कोई नहिं रोकणहार, मगन होइ मीरा चली।। लाज सरम कुल की मरजादा, सिरसै दूर करी। मान-अपमान दोऊ धर पटके, निकसी ग्यान गली।। ऊँची अटरिया लाल किंवड़िया, निरगुण-सेज बिछी। पंचरंगी झालर सुभ सोहै, फूलन फूल कली। बाजूबंद कडूला सोहै, सिंदूर मांग भरी। सुमिरण थाल हाथ में लीन्हों, सौभा अधिक खरी।। सेज सुखमणा मीरा सौहै, सुभ… Continue reading सुभ है आज घरी / मीराबाई
सांचो प्रीतम / मीराबाई
मैं गिरधर के घर जाऊँ। गिरधर म्हांरो सांचो प्रीतम देखत रूप लुभाऊँ।। रैण पड़ै तबही उठ जाऊँ भोर भये उठिआऊँ। रैन दिना वाके संग खेलूं ज्यूं त्यूं ताहि रिझाऊँ।। जो पहिरावै सोई पहिरूं जो दे सोई खाऊँ। मेरी उणकी प्रीति पुराणी उण बिन पल न रहाऊँ। जहाँ बैठावें तितही बैठूं बेचै तो बिक जाऊँ। मीरा… Continue reading सांचो प्रीतम / मीराबाई
चाकर राखो जी / मीराबाई
स्याम! मने चाकर राखो जी गिरधारी लाला! चाकर राखो जी। चाकर रहसूं बाग लगासूं नित उठ दरसण पासूं। ब्रिंदाबन की कुंजगलिन में तेरी लीला गासूं।। चाकरी में दरसण पाऊँ सुमिरण पाऊँ खरची। भाव भगति जागीरी पाऊँ, तीनूं बाता सरसी।। मोर मुकुट पीताम्बर सोहै, गल बैजंती माला। ब्रिंदाबन में धेनु चरावे मोहन मुरलीवाला।। हरे हरे नित… Continue reading चाकर राखो जी / मीराबाई
साजन घर आया हो / मीराबाई
सहेलियाँ साजन घर आया हो। बहोत दिनां की जोवती बिरहिण पिव पाया हो।। रतन करूँ नेवछावरी ले आरति साजूं हो। पिवका दिया सनेसड़ा ताहि बहोत निवाजूं हो।। पांच सखी इकठी भई मिलि मंगल गावै हो। पिया का रली बधावणा आणंद अंग न मावै हो। हरि सागर सूं नेहरो नैणां बंध्या सनेह हो। मरा सखी के… Continue reading साजन घर आया हो / मीराबाई
होरी खेलत हैं गिरधारी / मीराबाई
होरी खेलत हैं गिरधारी। मुरली चंग बजत डफ न्यारो। संग जुबती ब्रजनारी।। चंदन केसर छिड़कत मोहन अपने हाथ बिहारी। भरि भरि मूठ गुलाल लाल संग स्यामा प्राण पियारी। गावत चार धमार राग तहं दै दै कल करतारी।। फाग जु खेलत रसिक सांवरो बाढ्यौ रस ब्रज भारी। मीरा कूं प्रभु गिरधर मिलिया मोहनलाल बिहारी।।
पपैया रे! / मीराबाई
पपैया रे पिवकी बाणि न बोल। सुणि पावेली बिरहणी रे थारी रालेली पांख मरोड़।। चांच कटाऊँ पपैया रे ऊपर कालोर लूण। पिव मेरा मैं पिव की रे तू पिव कहै स कूण।। थारा सबद सुहावणा रे जो पिव मेला आज। चांच मंढाऊँ थारी सोवनी रे तू मेरे सिरताज।। प्रीतम कूं पतियां लिखूं रे कागा तूं… Continue reading पपैया रे! / मीराबाई
सखी री / मीराबाई
हे मेरो मनमोहना आयो नहीं सखी री। कैं कहुँ काज किया संतन का। कैं कहुँ गैल भुलावना।। हे मेरो मनमोहना। कहा करूँ कित जाऊँ मेरी सजनी। लाग्यो है बिरह सतावना।। हे मेरो मनमोहना।। मीरा दासी दरसण प्यासी। हरि-चरणां चित लावना।। हे मेरो मनमोहना।।
प्रभु किरपा कीजौ / मीराबाई
स्वामी सब संसार के हो सांचे श्रीभगवान।। स्थावर जंगम पावक पाणी धरती बीज समान। सबमें महिमा थांरी देखी कुदरत के कुरबान।। बिप्र सुदामा को दालद खोयो बाले की पहचान। दो मुट्ठी तंदुलकी चाबी दीन्हयों द्रव्य महान। भारत में अर्जुन के आगे आप भया रथवान। अर्जुन कुलका लोग निहारयां छुट गया तीर कमान। ना कोई मारे… Continue reading प्रभु किरपा कीजौ / मीराबाई
शरण गही प्रभु तेरी / मीराबाई
सुण लीजो बिनती मोरी, मैं शरण गही प्रभु तेरी। तुम(तो) पतित अनेक उधारे, भव सागर से तारे।। मैं सबका तो नाम न जानूं कोइ कोई नाम उचारे। अम्बरीष सुदामा नामा, तुम पहुँचाये निज धामा। ध्रुव जो पाँच वर्ष के बालक, तुम दरस दिये घनस्यामा। धना भक्त का खेत जमाया, कबिरा का बैल चराया।। सबरी का… Continue reading शरण गही प्रभु तेरी / मीराबाई