राग बिहाग माई म्हारी हरिजी न बूझी बात। पिंड मांसूं प्राण पापी निकस क्यूं नहीं जात॥ पट न खोल्या मुखां न बोल्या, सांझ भई परभात। अबोलणा जु बीतण लागो, तो काहे की कुशलात॥ सावण आवण होय रह्यो रे, नहीं आवण की बात। रैण अंधेरी बीज चमंकै, तारा गिणत निसि जात॥ सुपन में हरि दरस दीन्हों,… Continue reading माई म्हारी हरिजी न बूझी बात / मीराबाई
नातो नामको जी म्हांसूं तनक न तोड्यो जाय / मीराबाई
राग भांड नातो नामको जी म्हांसूं तनक न तोड्यो जाय॥ पानां ज्यूं पीली पड़ी रे, लोग कहैं पिंड रोग। छाने लांघण म्हैं किया रे, राम मिलण के जोग॥ बाबल बैद बुलाइया रे, पकड़ दिखाई म्हांरी बांह। मूरख बैद मरम नहिं जाणे, कसक कलेजे मांह॥ जा बैदां, घर आपणे रे, म्हांरो नांव न लेय। मैं तो… Continue reading नातो नामको जी म्हांसूं तनक न तोड्यो जाय / मीराबाई
गली तो चारों बंद हुई, मैं हरिसे मिलूं कैसे जाय / मीराबाई
राग जैजैवंती गली तो चारों बंद हुई, मैं हरिसे मिलूं कैसे जाय। ऊंची नीची राह लपटीली, पांव नहीं ठहराय। सोच सोच पग धरूं जतनसे, बार बार डिग जाय॥ ऊंचा नीचा महल पियाका म्हांसूं चढ़्यो न जाय। पिया दूर पंथ म्हारो झीणो, सुरत झकोला खाय॥ कोस कोस पर पहरा बैठ्या, पैंड़ पैंड़ बटमार। है बिधना, कैसी… Continue reading गली तो चारों बंद हुई, मैं हरिसे मिलूं कैसे जाय / मीराबाई
राम मिलण रो घणो उमावो, नित उठ जोऊं बाटड़ियाँ / मीराबाई
राग प्रभाती राम मिलण रो घणो उमावो, नित उठ जोऊं बाटड़ियाँ। दरस बिना मोहि कछु न सुहावै, जक न पड़त है आँखड़ियाँ॥ तड़फत तड़फत बहु दिन बीते, पड़ी बिरह की फांसड़ियाँ। अब तो बेग दया कर प्यारा, मैं छूं थारी दासड़ियाँ॥ नैण दुखी दरसणकूं तरसैं, नाभि न बैठें सांसड़ियाँ। रात-दिवस हिय आरत मेरो, कब हरि… Continue reading राम मिलण रो घणो उमावो, नित उठ जोऊं बाटड़ियाँ / मीराबाई
स्वामी सब संसार के हो सांचे श्रीभगवान / मीराबाई
राग सूहा स्वामी सब संसार के हो सांचे श्रीभगवान। स्थावर जंगम पावक पाणी धरती बीज समान॥ सब में महिमा थांरी देखी कुदरत के करबान। बिप्र सुदामा को दालद खोयो बाले की पहचान॥ दो मुट्ठी तंदुल कि चाबी दीन्ह्यों द्रव्य महान। भारत में अर्जुन के आगे आप भया रथवान॥ अर्जुन कुलका लोग निहार्या छुट गया तीरकमान।… Continue reading स्वामी सब संसार के हो सांचे श्रीभगवान / मीराबाई
अब तो निभायाँ सरेगी, बांह गहेकी लाज / मीराबाई
राग रामकली अब तो निभायाँ सरेगी, बांह गहेकी लाज। समरथ सरण तुम्हारी सइयां, सरब सुधारण काज॥ भवसागर संसार अपरबल, जामें तुम हो झयाज। निरधारां आधार जगत गुरु तुम बिन होय अकाज॥ जुग जुग भीर हरी भगतन की, दीनी मोच्छ समाज। मीरां सरण गही चरणन की, लाज रखो महाराज॥ शब्दार्थ :- निभायां =निबाहने से ही। सरेगी… Continue reading अब तो निभायाँ सरेगी, बांह गहेकी लाज / मीराबाई
प्यारे दरसन दीज्यो आय, तुम बिन रह्यो न जाय / मीराबाई
राग आसाबरी प्यारे दरसन दीज्यो आय, तुम बिन रह्यो न जाय॥ जल बिन कमल, चंद बिन रजनी। ऐसे तुम देख्यां बिन सजनी॥ आकुल व्याकुल फिरूं रैन दिन, बिरह कलेजो खाय॥ दिवस न भूख, नींद नहिं रैना, मुख सूं कथत न आवै बैना॥ कहा कहूं कछु कहत न आवै, मिलकर तपत बुझाय॥ क्यूं तरसावो अंतरजामी, आय… Continue reading प्यारे दरसन दीज्यो आय, तुम बिन रह्यो न जाय / मीराबाई
सुण लीजो बिनती मोरी, मैं शरण गही प्रभु तेरी / मीराबाई
सुण लीजो बिनती मोरी, मैं शरण गही प्रभु तेरी। तुम (तो) पतित अनेक उधारे, भवसागर से तारे॥ मैं सबका तो नाम न जानूं, कोई कोई नाम उचारे। अम्बरीष सुदामा नामा, तुम पहुंचाये निज धामा॥ ध्रुव जो पांच वर्ष के बालक, तुम दरस दिये घनस्यामा। धना भक्त का खेत जमाया, कबिरा का बैल चराया॥ सबरी का… Continue reading सुण लीजो बिनती मोरी, मैं शरण गही प्रभु तेरी / मीराबाई
हरि बिन कूण गती मेरी / मीराबाई
राग धुनपीलू हरि बिन कूण गती मेरी। तुम मेरे प्रतिपाल कहिये मैं रावरी चेरी॥ आदि अंत निज नाँव तेरो हीयामें फेरी। बेर बेर पुकार कहूं प्रभु आरति है तेरी॥ यौ संसार बिकार सागर बीच में घेरी। नाव फाटी प्रभु पाल बाँधो बूड़त है बेरी॥ बिरहणि पिवकी बाट जोवै राखल्यो नेरी। दासि मीरा राम रटत है… Continue reading हरि बिन कूण गती मेरी / मीराबाई
मेरो मन राम-हि-राम रटै / मीराबाई
मेरो मन राम-हि-राम रटै। राम-नाम जप लीजै प्राणी! कोटिक पाप कटै। जनम-जनम के खत जु पुराने, नामहि लेत फटै। कनक-कटोरै इमरत भरियो, नामहि लेत नटै। मीरा के प्रभु हरि अविनासी तन-मन ताहि पटै।