राग भीमपलासी गोबिन्द कबहुं मिलै पिया मेरा॥ चरण कंवल को हंस हंस देखूं, राखूं नैणां नेरा। निरखणकूं मोहि चाव घणेरो, कब देखूं मुख तेरा॥ व्याकुल प्राण धरत नहिं धीरज, मिल तूं मीत सबेरा। मीरा के प्रभु गिरधर नागर ताप तपन बहुतेरा॥ शब्दार्थ :- नैणा नेरा = आंखों के निकट। चाव = चाह। घणेरो =बहुत अधिक।… Continue reading गोबिन्द कबहुं मिलै पिया मेरा / मीराबाई
आओ मनमोहना जी जोऊं थांरी बाट / मीराबाई
राग टोडी आओ मनमोहना जी जोऊं थांरी बाट। खान पान मोहि नैक न भावै नैणन लगे कपाट॥ तुम आयां बिन सुख नहिं मेरे दिल में बहोत उचाट। मीरा कहै मैं बई रावरी, छांड़ो नाहिं निराट॥ शब्दार्थ :- जोऊं थारी बाट = तेरी राह देखती हूं। आयां बिनि =बिना आये। उचाट =बेचैनी। निराट = असहाय।
हरि बिन ना सरै री माई / मीराबाई
राग शुद्ध सारंग हरि बिन ना सरै री माई। मेरा प्राण निकस्या जात, हरी बिन ना सरै माई। मीन दादुर बसत जल में, जल से उपजाई॥ तनक जल से बाहर कीना तुरत मर जाई। कान लकरी बन परी काठ धुन खाई। ले अगन प्रभु डार आये भसम हो जाई॥ बन बन ढूंढत मैं फिरी माई… Continue reading हरि बिन ना सरै री माई / मीराबाई
साजन, सुध ज्यूं जाणो लीजै हो / मीराबाई
राग पूरिया कल्याण साजन, सुध ज्यूं जाणो लीजै हो। तुम बिन मोरे और न कोई, क्रिपा रावरी कीजै हो॥ दिन नहीं भूख रैण नहीं निंदरा, यूं तन पल पल छीजै हो। मीरा के प्रभु गिरधर नागर , मिल बिछड़न मत कीजै हो॥ शब्दार्थ :- साजन =प्रियतम। रावरी =तुम्हारी। निंदरा =नींद। बिछड़न =वियोग।
पिय बिन सूनो छै जी म्हारो देस / मीराबाई
राग दरबारी कान्हरा पिय बिन सूनो छै जी म्हारो देस॥ ऐसो है कोई पिवकूं मिलावै, तन मन करूं सब पेस। तेरे कारण बन बन डोलूं, कर जोगण को भेस॥ अवधि बदीती अजहूं न आए, पंडर हो गया केस। रा के प्रभु कब र मिलोगे, तज दियो नगर नरेस॥ शब्दार्थ :- सूनो = सूना। छै =है।… Continue reading पिय बिन सूनो छै जी म्हारो देस / मीराबाई
है मेरो मनमोहना, आयो नहीं सखी री / मीराबाई
राग सारंग है मेरो मनमोहना, आयो नहीं सखी री॥ कैं कहुं काज किया संतन का, कै कहुं गैल भुलावना॥ कहा करूं कित जाऊं मेरी सजनी, लाग्यो है बिरह सतावना॥ मीरा दासी दरसण प्यासी, हरिचरणां चित लावना॥ शब्दार्थ :-काज =काम। गैल = रास्ता। लावना =लगाना है।
मैं बिरहणि बैठी जागूं जगत सब सोवे री आली / मीराबाई
राग बागेश्री मैं बिरहणि बैठी जागूं जगत सब सोवे री आली॥ बिरहणी बैठी रंगमहल में, मोतियन की लड़ पोवै| इक बिहरणि हम ऐसी देखी, अंसुवन की माला पोवै॥ तारा गिण गिण रैण बिहानी , सुख की घड़ी कब आवै। मीरा के प्रभु गिरधर नागर, जब मोहि दरस दिखावै॥ शब्दार्थ :- बिरहणी =विरहनी। पोवै =गूंथती है।… Continue reading मैं बिरहणि बैठी जागूं जगत सब सोवे री आली / मीराबाई
प्रभुजी थे कहां गया नेहड़ो लगाय / मीराबाई
राग दरबारी प्रभुजी थे कहां गया नेहड़ो लगाय। छोड़ गया बिस्वास संगाती प्रेमकी बाती बलाय॥ बिरह समंद में छोड़ गया छो, नेहकी नाव चलाय। मीरा के प्रभु कब र मिलोगे, तुम बिन रह्यो न जाय॥ शब्दार्थ :- थे =तू। नेहड़ो = प्रेम। बाती बलाय =आग लगाकर। समंद =समुद्र। छो = हो। कब र = अरे,… Continue reading प्रभुजी थे कहां गया नेहड़ो लगाय / मीराबाई
सांवरा म्हारी प्रीत निभाज्यो जी / मीराबाई
राग धानी सांवरा म्हारी प्रीत निभाज्यो जी॥ थे छो म्हारा गुण रा सागर, औगण म्हारूं मति जाज्यो जी। लोकन धीजै (म्हारो) मन न पतीजै, मुखडारा सबद सुणाज्यो जी॥ मैं तो दासी जनम जनम की, म्हारे आंगणा रमता आज्यो जी। मीरा के प्रभु गिरधर नागर, बेड़ो पार लगाज्यो जी॥ शब्दार्थ :- निभाज्यो =निभा लेना। थे छौ… Continue reading सांवरा म्हारी प्रीत निभाज्यो जी / मीराबाई
दरस बिनु दूखण लागे नैन / मीराबाई
राग देश बिलंपत दरस बिनु दूखण लागे नैन। जबसे तुम बिछुड़े प्रभु मोरे, कबहुं न पायो चैन॥ सबद सुणत मेरी छतियां कांपे, मीठे लागे बैन। बिरह कथा कांसूं कहूं सजनी, बह गई करवत ऐन॥ कल न परत पल हरि मग जोवत, भई छमासी रैन। मीरा के प्रभू कब र मिलोगे, दुखमेटण सुखदैन॥ शब्दार्थ :- सुणत… Continue reading दरस बिनु दूखण लागे नैन / मीराबाई