साजन घर आओनी मीठा बोला / मीराबाई

राग पीलू साजन घर आओनी मीठा बोला॥ कदकी ऊभी मैं पंथ निहारूं थारो, आयां होसी मेला॥ आओ निसंक, संक मत मानो, आयां ही सुक्ख रहेला॥ तन मन वार करूं न्यौछावर, दीज्यो स्याम मोय हेला॥ आतुर बहुत बिलम मत कीज्यो, आयां हो रंग रहेला॥ तुमरे कारण सब रंग त्याग्या, काजल तिलक तमोला॥ तुम देख्या बिन कल… Continue reading साजन घर आओनी मीठा बोला / मीराबाई

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घर आंगण न सुहावै, पिया बिन मोहि न भावै / मीराबाई

राग काफी घर आंगण न सुहावै, पिया बिन मोहि न भावै॥ दीपक जोय कहा करूं सजनी, पिय परदेस रहावै। सूनी सेज जहर ज्यूं लागे, सिसक-सिसक जिय जावै॥ नैण निंदरा नहीं आवै॥ कदकी उभी मैं मग जोऊं, निस-दिन बिरह सतावै। कहा कहूं कछु कहत न आवै, हिवड़ो अति उकलावै॥ हरि कब दरस दिखावै॥ ऐसो है कोई… Continue reading घर आंगण न सुहावै, पिया बिन मोहि न भावै / मीराबाई

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म्हारी सुध ज्यूं जानो त्यूं लीजो / मीराबाई

राग कोसी म्हारी सुध ज्यूं जानो त्यूं लीजो॥ पल पल ऊभी पंथ निहारूं, दरसण म्हाने दीजो। मैं तो हूं बहु औगुणवाली, औगण सब हर लीजो॥ मैं तो दासी थारे चरण कंवलकी, मिल बिछड़न मत कीजो। मीरा के प्रभु गिरधर नागर, हरि चरणां चित दीजो॥ शब्दार्थ :- ऊभी =खड़ी। म्हाने = मुझे। औगण =अवगुण, दोष। कंवल… Continue reading म्हारी सुध ज्यूं जानो त्यूं लीजो / मीराबाई

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सखी, मेरी नींद नसानी हो / मीराबाई

राग आनंद भैरों सखी, मेरी नींद नसानी हो। पिवको पंथ निहारत सिगरी रैण बिहानी हो॥ सखिअन मिलकर सीख दई मन, एक न मानी हो। बिन देख्यां कल नाहिं पड़त जिय ऐसी ठानी हो॥ अंग अंग व्याकुल भई मुख पिय पिय बानी हो। अंतरबेदन बिरह की कोई पीर न जानी हो॥ ज्यूं चातक घनकूं रटै, मछली… Continue reading सखी, मेरी नींद नसानी हो / मीराबाई

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पिया मोहि दरसण दीजै हो / मीराबाई

राग देस पिया मोहि दरसण दीजै हो। बेर बेर मैं टेरहूं, या किरपा कीजै हो॥ जेठ महीने जल बिना पंछी दुख होई हो। मोर असाढ़ा कुरलहे घन चात्रा सोई हो॥ सावण में झड़ लागियो, सखि तीजां खेलै हो। भादरवै नदियां वहै दूरी जिन मेलै हो॥ सीप स्वाति ही झलती आसोजां सोई हो। देव काती में… Continue reading पिया मोहि दरसण दीजै हो / मीराबाई

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पपइया रे, पिव की वाणि न बोल / मीराबाई

राग सावनी कल्याण पपइया रे, पिव की वाणि न बोल। सुणि पावेली बिरहुणी रे, थारी रालेली पांख मरोड़॥ चोंच कटाऊं पपइया रे, ऊपर कालोर लूण। पिव मेरा मैं पीव की रे, तू पिव कहै स कूण॥ थारा सबद सुहावणा रे, जो पिव मेंला आज। चोंच मंढ़ाऊं थारी सोवनी रे, तू मेरे सिरताज॥ प्रीतम कूं पतियां… Continue reading पपइया रे, पिव की वाणि न बोल / मीराबाई

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करुणा सुणो स्याम मेरी, मैं तो होय रही चेरी तेरी / मीराबाई

राग पीलू करुणा सुणो स्याम मेरी, मैं तो होय रही चेरी तेरी॥ दरसण कारण भई बावरी बिरह-बिथा तन घेरी। तेरे कारण जोगण हूंगी, दूंगी नग्र बिच फेरी॥ कुंज बन हेरी-हेरी॥ अंग भभूत गले मृगछाला, यो तप भसम करूं री। अजहुं न मिल्या राम अबिनासी बन-बन बीच फिरूं री॥ रोऊं नित टेरी-टेरी॥ जन मीरा कूं गिरधर… Continue reading करुणा सुणो स्याम मेरी, मैं तो होय रही चेरी तेरी / मीराबाई

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तुम्हरे कारण सब छोड्या, अब मोहि क्यूं तरसावौ हौ / मीराबाई

धुन लावनी तुम्हरे कारण सब छोड्या, अब मोहि क्यूं तरसावौ हौ। बिरह-बिथा लागी उर अंतर, सो तुम आय बुझावौ हो॥ अब छोड़त नहिं बड़ै प्रभुजी, हंसकर तुरत बुलावौ हौ। मीरा दासी जनम जनम की, अंग से अंग लगावौ हौ॥ शब्दार्थ :- कारण =लिए, खातिर। छोड़त नहिं बड़ै = छोड़ने से काम नहीं चलेगा।

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मैं हरि बिन क्यों जिऊं री माइ / मीराबाई

राग भैरवी मैं हरि बिन क्यों जिऊं री माइ॥ पिव कारण बौरी भई, ज्यूं काठहि घुन खाइ॥ ओखद मूल न संचरै, मोहि लाग्यो बौराइ॥ कमठ दादुर बसत जल में जलहि ते उपजाइ। मीन जल के बीछुरे तन तलफि करि मरि जाइ॥ पिव ढूंढण बन बन गई, कहुं मुरली धुनि पाइ। मीरा के प्रभु लाल गिरधर… Continue reading मैं हरि बिन क्यों जिऊं री माइ / मीराबाई

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राम मिलण के काज सखी, मेरे आरति उर में जागी री / मीराबाई

राग पीलू राम मिलण के काज सखी, मेरे आरति उर में जागी री॥ तड़फत तड़फत कल न परत है, बिरहबाण उर लागी री। निसदिन पंथ निहारूं पिव को, पलक न पल भरि लागी री॥ पीव पीव मैं रटूं रात दिन, दूजी सुध बुध भागी री। बिरह भुजंग मेरो डस्यो है कलेजो, लहर हलाहल जागी री॥… Continue reading राम मिलण के काज सखी, मेरे आरति उर में जागी री / मीराबाई

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