सहेलियां साजन घर आया हो / मीराबाई

राग देस पिया मोहि दरसण दीजै हो। बेर बेर मैं टेरहूं, या किरपा कीजै हो॥ जेठ महीने जल बिना पंछी दुख होई हो। मोर असाढ़ा कुरलहे घन चात्रा सोई हो॥ सावण में झड़ लागियो, सखि तीजां खेलै हो। भादरवै नदियां वहै दूरी जिन मेलै हो॥ सीप स्वाति ही झलती आसोजां सोई हो। देव काती में… Continue reading सहेलियां साजन घर आया हो / मीराबाई

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जोसीड़ा ने लाख बधाई रे अब घर आये स्याम / मीराबाई

राग सोरठ जोसीड़ा ने लाख बधाई रे अब घर आये स्याम॥ आज आनंद उमंगि भयो है जीव लहै सुखधाम। पांच सखी मिलि पीव परसिकैं आनंद ठामूं ठाम॥ बिसरि गयो दुख निरखि पियाकूं, सुफल मनोरथ काम। मीराके सुखसागर स्वामी भवन गवन कियो राम॥ शब्दार्थ :- जोसीड़ा = ज्योतिषी। पांच सखी = पांच ज्ञानेन्द्रियों से आशय है।… Continue reading जोसीड़ा ने लाख बधाई रे अब घर आये स्याम / मीराबाई

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मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई / मीराबाई

मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई॥ जाके सिर है मोरपखा मेरो पति सोई। तात मात भ्रात बंधु आपनो न कोई॥ छांड़ि दई कुलकी कानि कहा करिहै कोई॥ संतन ढिग बैठि बैठि लोकलाज खोई॥ चुनरीके किये टूक ओढ़ लीन्हीं लोई। मोती मूंगे उतार बनमाला पोई॥ अंसुवन जल सींचि-सींचि प्रेम-बेलि बोई। अब तो बेल फैल गई… Continue reading मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई / मीराबाई

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बड़े घर ताली लागी रे, म्हारां मन री उणारथ भागी रे / मीराबाई

राग पीलू बरवा बड़े घर ताली लागी रे, म्हारां मन री उणारथ भागी रे॥ छालरिये म्हारो चित नहीं रे, डाबरिये कुण जाव। गंगा जमना सूं काम नहीं रे, मैंतो जाय मिलूं दरियाव॥ हाल्यां मोल्यांसूं काम नहीं रे, सीख नहीं सिरदार। कामदारासूं काम नहीं रे, मैं तो जाब करूं दरबार॥ काच कथीरसूं काम नहीं रे, लोहा… Continue reading बड़े घर ताली लागी रे, म्हारां मन री उणारथ भागी रे / मीराबाई

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या मोहन के रूप लुभानी / मीराबाई

राग गूजरी या मोहन के रूप लुभानी। सुंदर बदन कमलदल लोचन, बांकी चितवन मंद मुसकानी॥ जमना के नीरे तीरे धेनु चरावै, बंसी में गावै मीठी बानी। तन मन धन गिरधर पर बारूं, चरणकंवल मीरा लपटानी॥ शब्दार्थ :- दल =पंखुड़ी। बांकी =टेढ़ी। नीरे =निकट।

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मेरे नैना निपट बंकट छबि अटके / मीराबाई

राग त्रिवेनी (मेरे) नैना निपट बंकट छबि अटके॥ देखत रूप मदनमोहनको पियत पियूख न मटके। बारिज भवां अलक टेढ़ी मनौ अति सुगंधरस अटके॥ टेढ़ी कटि टेढ़ी कर मुरली टेढ़ी पाग लर लटके। मीरा प्रभु के रूप लुभानी गिरधर नागर नटके॥ शब्दार्थ :- निपट =बिल्कुल। बंकट =टेढ़े, श्रीकृष्ण का एक नाम त्रिभंगी भी है अर्थात तीन… Continue reading मेरे नैना निपट बंकट छबि अटके / मीराबाई

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स्याम मोरी बांहड़ली जी गहो / मीराबाई

राग बिहाग स्याम मोरी बांहड़ली जी गहो। या भवसागर मंझधार में थे ही निभावण हो॥ म्हाने औगण घणा रहै प्रभुजी थे ही सहो तो सहो। मीरा के प्रभु हरि अबिनासी लाज बिरद की बहो॥ शब्दार्थ :- थे =तुम। घणा छै = बहुत है। बहो = वहन करो, रखो।

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तुम सुणौ दयाल म्हारी अरजी / मीराबाई

राग दरबारी-ताल तिताला तुम सुणौ दयाल म्हारी अरजी॥ भवसागर में बही जात हौं, काढ़ो तो थारी मरजी। इण संसार सगो नहिं कोई, सांचा सगा रघुबरजी॥ मात पिता औ कुटुम कबीलो सब मतलब के गरजी। मीरा की प्रभु अरजी सुण लो चरण लगाओ थारी मरजी॥ शब्दार्थ :-म्हारी =मेरी। काढ़ो =निकाढ़ लो, निकाल ले। इण =यह। गरजी… Continue reading तुम सुणौ दयाल म्हारी अरजी / मीराबाई

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थे तो पलक उघाड़ो दीनानाथ / मीराबाई

राग प्रभाती थे तो पलक उघाड़ो दीनानाथ,मैं हाजिर-नाजिर कद की खड़ी॥ साजणियां दुसमण होय बैठ्या, सबने लगूं कड़ी। तुम बिन साजन कोई नहिं है, डिगी नाव मेरी समंद अड़ी॥ दिन नहिं चैन रैण नहीं निदरा, सूखूं खड़ी खड़ी। बाण बिरह का लग्या हिये में, भूलुं न एक घड़ी॥ पत्थर की तो अहिल्या तारी बन के… Continue reading थे तो पलक उघाड़ो दीनानाथ / मीराबाई

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म्हारे जनम-मरण साथी थांने नहीं बिसरूं दिनराती / मीराबाई

राग प्रभावती म्हारे जनम-मरण साथी थांने नहीं बिसरूं दिनराती॥ थां देख्या बिन कल न पड़त है, जाणत मेरी छाती। ऊंची चढ़-चढ़ पंथ निहारूं रोय रोय अंखियां राती॥ यो संसार सकल जग झूठो, झूठा कुलरा न्याती। दोउ कर जोड्यां अरज करूं छूं सुण लीज्यो मेरी बाती॥ यो मन मेरो बड़ो हरामी ज्यूं मदमाती हाथी। सतगुर हस्त… Continue reading म्हारे जनम-मरण साथी थांने नहीं बिसरूं दिनराती / मीराबाई

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