राग पहाड़ी सीसोद्यो रूठ्यो तो म्हांरो कांई कर लेसी। म्हे तो गुण गोविन्द का गास्यां हो माई॥ राणोजी रूठ्यो वांरो देस रखासी,हरि रूठ्या किठे जास्यां हो माई॥ लोक लाजकी काण न मानां,निरभै निसाण घुरास्यां हो माई॥ राम नामकी झाझ चलास्यां,भौ-सागर तर जास्यां हो माई॥ मीरा सरण सांवल गिरधर की, चरण कंवल लपटास्यां हो माई॥ शब्दार्थ… Continue reading सीसोद्यो रूठ्यो तो म्हांरो कांई कर लेसी / मीराबाई
छोड़ मत जाज्यो जी महाराज / मीराबाई
राग तिलक कामोद छोड़ मत जाज्यो जी महाराज॥ मैं अबला बल नायं गुसाईं, तुमही मेरे सिरताज। मैं गुणहीन गुण नांय गुसाईं, तुम समरथ महाराज॥ थांरी होयके किणरे जाऊं, तुमही हिबडारो साज। मीरा के प्रभु और न कोई राखो अबके लाज॥ शब्दार्थ :- नांय = नहीं। थांरी =तुम्हारी। किणरे =किसकी। हिबडारो =हृदय के।
आली , सांवरे की दृष्टि मानो, प्रेम की कटारी है / मीराबाई
राग हंस नारायण आली , सांवरे की दृष्टि मानो, प्रेम की कटारी है॥ लागत बेहाल भई, तनकी सुध बुध गई , तन मन सब व्यापो प्रेम, मानो मतवारी है॥ सखियां मिल दोय चारी, बावरी सी भई न्यारी, हौं तो वाको नीके जानौं, कुंजको बिहारी॥ चंदको चकोर चाहे, दीपक पतंग दाहै, जल बिना मीन जैसे, तैसे… Continue reading आली , सांवरे की दृष्टि मानो, प्रेम की कटारी है / मीराबाई
हरी मेरे जीवन प्रान अधार / मीराबाई
राग हमीर हरी मेरे जीवन प्रान अधार। और आसरो नाहीं तुम बिन तीनूं लोक मंझार॥ आप बिना मोहि कछु न सुहावै निरख्यौ सब संसार। मीरा कहै मैं दासि रावरी दीज्यो मती बिसार॥ शब्दार्थ :- आसरो = सहारा। मंझार =में। रावरी =तुम्हारी।
जागो म्हांरा जगपतिरायक हंस बोलो क्यूं नहीं / मीराबाई
राग प्रभाती जागो म्हांरा जगपतिरायक हंस बोलो क्यूं नहीं॥ हरि छो जी हिरदा माहिं पट खोलो क्यूं नहीं॥ तन मन सुरति संजोइ सीस चरणां धरूं। जहां जहां देखूं म्हारो राम तहां सेवा करूं॥ सदकै करूं जी सरीर जुगै जुग वारणैं। छोड़ी छोड़ी लिखूं सिलाम बहोत करि जानज्यौ। बंदी हूं खानाजाद महरि करि मानज्यौ॥ हां हो… Continue reading जागो म्हांरा जगपतिरायक हंस बोलो क्यूं नहीं / मीराबाई
आओ सहेल्हां रली करां है पर घर गवण निवारि / मीराबाई
राग हमीर आओ सहेल्हां रली करां है पर घर गवण निवारि॥ झूठा माणिक मोतिया री झूठी जगमग जोति। झूठा आभूषण री, सांची पियाजी री प्रीति॥ झूठा पाट पटंबरा रे, झूठा दिखडणी चीर। सांची पियाजी री गूदड़ी, जामें निरमल रहे सरीर॥ छपन भोग बुहाय देहे इण भोगन में दाग। लूण अलूणो ही भलो है अपणे पियाजीरो… Continue reading आओ सहेल्हां रली करां है पर घर गवण निवारि / मीराबाई
म्हांरे घर होता जाज्यो राज / मीराबाई
राग सिंध भैरवी म्हांरे घर होता जाज्यो राज। अबके जिन टाला दे जाओ, सिर पर राखूं बिराज॥ म्हे तो जनम जनम की दासी, थे म्हांका सिरताज। पावणडा म्हांके भलां ही पधार्या, सब ही सुधारण काज॥ म्हे तो बुरी छां थांके भली छै, घणोरी तुम हो एक रसराज। थांने हम सब ही की चिंता, (तुम) सबके… Continue reading म्हांरे घर होता जाज्यो राज / मीराबाई
हमारो प्रणाम बांकेबिहारी को / मीराबाई
राग ललित हमारो प्रणाम बांकेबिहारी को। मोर मुकुट माथे तिलक बिराजे, कुंडल अलका कारी को॥ अधर मधुर पर बंसी बजावै रीझ रिझावै राधा प्यारी को। यह छवि देख मगन भई मीरा, मोहन गिरधर -धारी को॥ शब्दार्थ :- अलका कारी =काली अलकें। रिझावै =प्रसन्न करते हैं।
म्हारा ओलगिया घर आया जी / मीराबाई
राग कजरी म्हारा ओलगिया घर आया जी। तन की ताप मिटी सुख पाया, हिल मिल मंगल गाया जी॥ घन की धुनि सुनि मोर मगन भया, यूं मेरे आनंद छाया जी। मग्न भई मिल प्रभु अपणा सूं, भौका दरद मिटाया जी॥ चंद कूं निरखि कमोदणि फूलैं, हरषि भया मेरे काया जी। रग रग सीतल भई मेरी… Continue reading म्हारा ओलगिया घर आया जी / मीराबाई
पियाजी म्हारे नैणां आगे रहज्यो जी / मीराबाई
राग सावनी कल्याण पपइया रे, पिव की वाणि न बोल। सुणि पावेली बिरहुणी रे, थारी रालेली पांख मरोड़॥ चोंच कटाऊं पपइया रे, ऊपर कालोर लूण। पिव मेरा मैं पीव की रे, तू पिव कहै स कूण॥ थारा सबद सुहावणा रे, जो पिव मेंला आज। चोंच मंढ़ाऊं थारी सोवनी रे, तू मेरे सिरताज॥ प्रीतम कूं पतियां… Continue reading पियाजी म्हारे नैणां आगे रहज्यो जी / मीराबाई