री, मेरे पार निकस गया सतगुर मार्‌या तीर / मीराबाई

राग धानी री, मेरे पार निकस गया सतगुर मार्‌या तीर। बिरह-भाल लगी उर अंदर, व्याकुल भया सरीर॥ इत उत चित्त चलै नहिं कबहूं, डारी प्रेम-जंजीर। कै जाणै मेरो प्रीतम प्यारो, और न जाणै पीर॥ कहा करूं मेरों बस नहिं सजनी, नैन झरत दोउ नीर। मीरा कहै प्रभु तुम मिलियां बिन प्राण धरत नहिं धीर॥ शब्दार्थ… Continue reading री, मेरे पार निकस गया सतगुर मार्‌या तीर / मीराबाई

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लागी मोहिं नाम-खुमारी हो / मीराबाई

राग मलार लागी मोहिं नाम-खुमारी हो॥ रिमझिम बरसै मेहड़ा भीजै तन सारी हो। चहुंदिस दमकै दामणी गरजै घन भारी हो॥ सतगुर भेद बताया खोली भरम -किंवारी हो। सब घट दीसै आतमा सबहीसूं न्यारी हो॥ दीपग जोऊं ग्यानका चढूं अगम अटारी हो। मीरा दासी रामकी इमरत बलिहारी हो॥ शब्दार्थ :- खुमारी =थकावट, हल्का नशा। मेहड़ा =मेघ,… Continue reading लागी मोहिं नाम-खुमारी हो / मीराबाई

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लेतां लेतां रामनाम रे, लोकड़ियां तो लाजो मरै छे / मीराबाई

राग बिलावल लेतां लेतां रामनाम रे, लोकड़ियां तो लाजो मरै छे। हरि मंदिर जातां पांवड़ियां रे दूखै, फिर आवै आखो गाम रे। झगड़ो धाय त्यां दौड़ीने जाय रे, मूकीने घर ना काम रे॥ भांड भवैया गणकात्रित करतां वैसी रहे चारे जाम रे। मीरा ना प्रभु गिरधर नागर चरण कंवल चित हाय रे॥ सब्दार्थ :- लोकड़ियां… Continue reading लेतां लेतां रामनाम रे, लोकड़ियां तो लाजो मरै छे / मीराबाई

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रमइया बिन यो जिवडो दुख पावै / मीराबाई

राग बिहागरा रमइया बिन यो जिवडो दुख पावै। कहो कुण धीर बंधावै॥ यो संसार कुबुधि को भांडो, साध संगत नहीं भावै। राम-नाम की निंद्या ठाणै, करम ही करम कुमावै॥ राम-नाम बिन मुकति न पावै, फिर चौरासी जावै। साध संगत में कबहुं न जावै, मूरख जनम गुमावै॥ मीरा प्रभु गिरधर के सरणै, जीव परमपद पावै॥ शब्दार्थ… Continue reading रमइया बिन यो जिवडो दुख पावै / मीराबाई

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नहिं एसो जनम बारंबार / मीराबाई

राग हमीर नहिं एसो जनम बारंबार॥ का जानूं कछु पुन्य प्रगटे मानुसा-अवतार। बढ़त छिन-छिन घटत पल-पल जात न लागे बार॥ बिरछके ज्यूं पात टूटे, लगें नहीं पुनि डार। भौसागर अति जोर कहिये अनंत ऊंड़ी धार॥ रामनाम का बांध बेड़ा उतर परले पार। ज्ञान चोसर मंडा चोहटे सुरत पासा सार॥ साधु संत महंत ग्यानी करत चलत… Continue reading नहिं एसो जनम बारंबार / मीराबाई

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चालो अगमके देस कास देखत डरै / मीराबाई

राग शुद्ध सारंग चालो अगमके देस कास देखत डरै। वहां भरा प्रेम का हौज हंस केल्यां करै॥ ओढ़ण लज्जा चीर धीरज कों घांघरो। छिमता कांकण हाथ सुमत को मूंदरो॥ दिल दुलड़ी दरियाव सांचको दोवडो। उबटण गुरुको ग्यान ध्यान को धोवणो॥ कान अखोटा ग्यान जुगतको झोंटणो। बेसर हरिको नाम चूड़ो चित ऊजणो॥ पूंची है बिसवास काजल… Continue reading चालो अगमके देस कास देखत डरै / मीराबाई

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भज ले रे मन, गोपाल-गुना / मीराबाई

राग झंझोटी भज ले रे मन, गोपाल-गुना॥ अधम तरे अधिकार भजनसूं, जोइ आये हरि-सरना। अबिसवास तो साखि बताऊं, अजामील गणिका सदना॥ जो कृपाल तन मन धन दीन्हौं, नैन नासिका मुख रसना। जाको रचत मास दस लागै, ताहि न सुमिरो एक छिना॥ बालापन सब खेल गमायो, तरुण भयो जब रूप घना। वृद्ध भयो जब आलस उपज्यो,… Continue reading भज ले रे मन, गोपाल-गुना / मीराबाई

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मीरा मगन भई हरि के गुण गाय / मीराबाई

राग खम्माच मीरा मगन भई हरि के गुण गाय॥ सांप पिटारा राणा भेज्या, मीरा हाथ दिया जाय। न्हाय धोय जब देखन लागी, सालिगराम गई पाय॥ जहरका प्याला राणा भेज्या, इम्रत दिया बनाय। न्हाय धोय जब पीवन लागी, हो गई अमर अंचाय॥ सूली सेज राणा ने भेजी, दीज्यो मीरा सुवाय। सांझ भई मीरा सोवण लागी, मानो… Continue reading मीरा मगन भई हरि के गुण गाय / मीराबाई

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कुण बांचे पाती, बिना प्रभु कुण बांचे पाती / मीराबाई

राग गूजरी कुण बांचे पाती, बिना प्रभु कुण बांचे पाती। कागद ले ऊधोजी आयो, कहां रह्या साथी। आवत जावत पांव घिस्या रे (वाला) अंखिया भई राती॥ कागद ले राधा वांचण बैठी, (वाला) भर आई छाती। नैण नीरज में अम्ब बहे रे (बाला) गंगा बहि जाती॥ पाना ज्यूं पीली पड़ी रे (वाला) धान नहीं खाती। हरि… Continue reading कुण बांचे पाती, बिना प्रभु कुण बांचे पाती / मीराबाई

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सखी री लाज बैरण भई / मीराबाई

राग जौनपुरी सखी री लाज बैरण भई। श्रीलाल गोपालके संग काहें नाहिं गई॥ कठिन क्रूर अक्रूर आयो साज रथ कहं नई। रथ चढ़ाय गोपाल ले गयो हाथ मींजत रही॥ कठिन छाती स्याम बिछड़त बिरहतें तन तई। दासि मीरा लाल गिरधर बिखर क्यूं ना गई॥ शब्दार्थ :- बैरण = बैरिन, बाधा पहुंचाने वाली। नई = रथ… Continue reading सखी री लाज बैरण भई / मीराबाई

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