कृष्ण करो जजमान / मीराबाई

कृष्ण करो जजमान॥ प्रभु तुम॥ध्रु०॥ जाकी किरत बेद बखानत। सांखी देत पुरान॥ प्रभु०२॥ मोर मुकुट पीतांबर सोभत। कुंडल झळकत कान॥ प्रभु०३॥ मीराके प्रभू गिरिधर नागर। दे दरशनको दान॥ प्रभु०४॥

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हातकी बिडिया लेव मोरे बालक / मीराबाई

हातकी बिडिया लेव मोरे बालक। मोरे बालम साजनवा॥ध्रु०॥ कत्था चूना लवंग सुपारी बिडी बनाऊं गहिरी। केशरका तो रंग खुला है मारो भर पिचकारी॥१॥ पक्के पानके बिडे बनाऊं लेव मोरे बालमजी। हांस हांसकर बाता बोलो पडदा खोलोजी॥२॥ मीराके प्रभु गिरिधर नागर बोलत है प्यारी। अंतर बालक यारो दासी हो तेरी॥३॥

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तुम बिन मेरी कौन खबर ले / मीराबाई

तुम बिन मेरी कौन खबर ले। गोवर्धन गिरिधारीरे॥ध्रु०॥ मोर मुगुट पीतांबर सोभे। कुंडलकी छबी न्यारीरे॥ तुम०॥१॥ भरी सभामों द्रौपदी ठारी। राखो लाज हमारी रे॥ तुम०॥२॥ मीराके प्रभु गिरिधर नागर। चरनकमल बलहारीरे॥ तुम०॥३॥

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झुलत राधा संग / मीराबाई

झुलत राधा संग। गिरिधर झूलत राधा संग॥ध्रु०॥ अबिर गुलालकी धूम मचाई। भर पिचकारी रंग॥ गिरि०॥१॥ लाल भई बिंद्रावन जमुना। केशर चूवत रंग॥ गिरि०॥२॥ नाचत ताल आधार सुरभर। धिमी धिमी बाजे मृदंग॥ गिरि०॥३॥ मीराके प्रभु गिरिधर नागर। चरनकमलकू दंग॥ गिरि०॥४॥

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हरि गुन गावत नाचूंगी / मीराबाई

हरि गुन गावत नाचूंगी॥ध्रु०॥ आपने मंदिरमों बैठ बैठकर। गीता भागवत बाचूंगी॥१॥ ग्यान ध्यानकी गठरी बांधकर। हरीहर संग मैं लागूंगी॥२॥ मीराके प्रभु गिरिधर नागर। सदा प्रेमरस चाखुंगी॥३॥

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कान्हा बनसरी बजाय गिरधारी / मीराबाई

कान्हा बनसरी बजाय गिरधारी। तोरि बनसरी लागी मोकों प्यारीं॥ध्रु०॥ दहीं दुध बेचने जाती जमुना। कानानें घागरी फोरी॥ काना०॥१॥ सिरपर घट घटपर झारी। उसकूं उतार मुरारी॥ काना०॥२॥ सास बुरीरे ननंद हटेली। देवर देवे मोको गारी॥ काना०॥३॥ मीरा कहे प्रभु गिरिधर नागर। चरनकमल बलहारी॥ काना०॥४॥

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बात क्या कहूं नागरनटकी / मीराबाई

बात क्या कहूं नागरनटकी। नागर नटकी नागर०॥ध्रु०॥ हूं दधी बेचत जात ब्रिंदावन। छीन लीई मोरी दधीकी मटकी॥१॥ मोर मुकूट पीतांबर शोभे। अती शोभा उस कौस्तुभ मनकी॥२॥ मीरा कहे प्रभु गिरिधर नागर। प्रीत लगी उस मुरलीधरकी॥३॥

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पानी में मीन प्यासी / मीराबाई

पानी में मीन प्यासी। मोहे सुन सुन आवत हांसी॥ध्रु०॥ आत्मज्ञानबिन नर भटकत है। कहां मथुरा काशी॥१॥ भवसागर सब हार भरा है। धुंडत फिरत उदासी॥२॥ मीरा कहे प्रभु गिरिधर नागर। सहज मिळे अविनशी॥३॥

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नाव किनारे लगाव प्रभुजी / मीराबाई

नाव किनारे लगाव प्रभुजी नाव किना०॥ध्रु०॥ नदीया घहेरी नाव पुरानी। डुबत जहाज तराव॥१॥ ग्यान ध्यानकी सांगड बांधी। दवरे दवरे आव॥२॥ मीरा कहे प्रभु गिरिधर नागर। पकरो उनके पाव॥३॥

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तेरे सावरे मुखपरवारी / मीराबाई

तेरे सावरे मुखपरवारी। वारी वारी बलिहारी॥ध्रु०॥ मोर मुगुट पितांबर शोभे। कुंडलकी छबि न्यारी न्यारी॥१॥ ब्रिंदामनमों धेनु चरावे। मुरली बजावत प्यारी॥२॥ मीरा कहे प्रभु गिरिधर नागर। चरणकमल चित्त वारी॥३॥

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