राणोजी रूठे तो म्हारो कांई करसी म्हे तो गोविन्दरा गुण गास्यां हे माय॥ राणोजी रूठे तो अपने देश रखासी म्हे तो हरि रूठ्यां रूठे जास्यां हे माय। लोक-लाजकी काण न राखां म्हे तो निर्भय निशान गुरास्यां हे माय। राम नाम की जहाज चलास्यां म्हे तो भवसागर तिर जास्यां हे माय। हरिमंदिर में निरत करास्यां म्हे… Continue reading राणोजी रूठे तो म्हारो कांई करसी / मीराबाई
आज मोहिं लागे वृन्दावन नीको / मीराबाई
आज मोहिं लागे वृन्दावन नीको॥ घर-घर तुलसी ठाकुर सेवा दरसन गोविन्द जी को॥१॥ निरमल नीर बहत जमुना में भोजन दूध दही को। रतन सिंघासण आपु बिराजैं मुकुट धर।ह्यो तुलसी को॥२॥ कुंजन कुंजन फिरत राधिका सबद सुणत मुरली को। मीरा के प्रभु गिरधर नागर भजन बिना नर फीको॥३॥
दूर नगरी बड़ी दूर नगरी / मीराबाई
दूर नगरी बड़ी दूर नगरी-नगरी कैसे आऊं मैं तेरी गोकुल नगरी दूर नगरी बड़ी दूर नगरी रात को आऊं कान्हा डर माही लागे दिन को आऊं तो देखे सारी नगरी। दूर नगरी॥। सखी संग आऊं कान्हा शर्म मोहे लागे अकेली आऊं तो भूल जाऊं तेरी डगरी। दूर नगरी॥॥। धीरे-धीरे चलूं तो कमर मोरी लचके झटपट… Continue reading दूर नगरी बड़ी दूर नगरी / मीराबाई
मीरा के प्रभु गिरधर नागर काटो जम का फंदा / मीराबाई
नटवर नागर नन्दा भजो रे मन गोविन्दा श्याम सुन्दर मुख चन्दा भजो रे मन गोविन्दा। तू ही नटवर तू ही नागर तू ही बाल मुकुन्दा सब देवन में कृष्ण बड़े हैं ज्यूं तारा बिच चंदा। सब सखियन में राधा जी बड़ी हैं ज्यूं नदियन बिच गंगा ध्रुव तारे प्रहलाद उबारे नरसिंह रूप धरता। कालीदह में… Continue reading मीरा के प्रभु गिरधर नागर काटो जम का फंदा / मीराबाई
मीरा शरण गही चरणन की लाज रखो महाराज / मीराबाई
अब तो निभायां सरेगी बांह गहे की लाज। समरथ शरण तुम्हारी सैयां सरब सुधारण काज॥ भवसागर संसार अपरबल जामे तुम हो जहाज। गिरधारां आधार जगत गुरु तुम बिन होय अकाज॥ जुग जुग भीर हरी भगतन की दीनी मोक्ष समाज। मीरा शरण गही चरणन की लाज रखो महाराज॥
मोहन गिरवरधारी को म्हारो प्रणाम / मीराबाई
म्हारो प्रणाम बांकेबिहारीको। मोर मुकुट माथे तिलक बिराजे। कुण्डल अलका कारीको म्हारो प्रणाम॥ अधर मधुर कर बंसी बजावै। रीझ रीझौ राधाप्यारीको म्हारो प्रणाम॥ यह छबि देख मगन भ मीरा। मोहन गिरवरधारीको म्हारो प्रणाम॥
दरस म्हारे बेगि दीज्यो जी / मीराबाई
दरस म्हारे बेगि दीज्यो जी ओ जी अन्तरजामी ओ राम खबर म्हारी बेगि लीज्यो जी आप बिन मोहे कल ना पडत है जी ओजी तडपत हूं दिन रैन रैन में नीर ढले है जी गुण तो प्रभुजी मों में एक नहीं छै जी ओ जी अवगुण भरे हैं अनेक अवगुण म्हारां माफ करीज्यो जी भगत… Continue reading दरस म्हारे बेगि दीज्यो जी / मीराबाई
जागो बंसी वारे जागो मोरे ललन / मीराबाई
जागो बंसी वारे जागो मोरे ललन। रजनी बीती भोर भयो है घर घर खुले किवारे। गोपी दही मथत सुनियत है कंगना के झनकारे। उठो लालजी भोर भयो है सुर नर ठाढ़े द्वारे । ग्वाल बाल सब करत कोलाहल जय जय सबद उचारे । मीरा के प्रभु गिरधर नागर शरण आया कूं तारे ॥
अब तो मेरा राम / मीराबाई
अब तो मेरा राम नाम दूसरा न कोई॥ माता छोडी पिता छोडे छोडे सगा भाई। साधु संग बैठ बैठ लोक लाज खोई॥ सतं देख दौड आई, जगत देख रोई। प्रेम आंसु डार डार, अमर बेल बोई॥ मारग में तारग मिले, संत राम दोई। संत सदा शीश राखूं, राम हृदय होई॥ अंत में से तंत काढयो,… Continue reading अब तो मेरा राम / मीराबाई
झूठी जगमग जोति / मीराबाई
आवो सहेल्या रली करां हे, पर घर गावण निवारि। झूठा माणिक मोतिया री, झूठी जगमग जोति। झूठा सब आभूषण री, सांचि पियाजी री पोति। झूठा पाट पटंबरारे, झूठा दिखणी चीर। सांची पियाजी री गूदडी, जामे निरमल रहे सरीर। छप्प भोग बुहाई दे है, इन भोगिन में दाग। लूण अलूणो ही भलो है, अपणो पियाजी को… Continue reading झूठी जगमग जोति / मीराबाई