बरसै बदरिया सावन की सावन की मनभावन की / मीराबाई

बरसै बदरिया सावन की सावन की मनभावन की। सावन में उमग्यो मेरो मनवा भनक सुनी हरि आवन की। उमड़ घुमड़ चहुं दिसि से आयो दामण दमके झर लावन की। नान्हीं नान्हीं बूंदन मेहा बरसै सीतल पवन सोहावन की। मीराके प्रभु गिरधर नागर आनंद मंगल गावन की।

Published
Categorized as Mirabai

मन रे परसि हरिके चरण / मीराबाई

मन रे परसि हरिके चरण। सुभग सीतल कंवल कोमलत्रिविध ज्वाला हरण। जिण चरण प्रहलाद परसे इंद्र पदवी धरण॥ जिण चरण ध्रुव अटल कीन्हे राख अपनी सरण। जिण चरण ब्रह्मांड भेटयो नखसिखां सिर धरण॥ जिण चरण प्रभु परसि लीने तेरी गोतम घरण। जिण चरण कालीनाग नाथ्यो गोप लीला-करण॥ जिण चरण गोबरधन धार।ह्यो गर्व मघवा हरण। दासि… Continue reading मन रे परसि हरिके चरण / मीराबाई

Published
Categorized as Mirabai

बंसीवारा आज्यो म्हारे देस, सांवरी सुरत वारी बेस / मीराबाई

बंसीवारा आज्यो म्हारे देस। सांवरी सुरत वारी बेस॥ आऊं-आऊं कर गया जी कर गया कौल अनेक। गिणता-गिणता घस ग म्हारी आंगलिया री रेख॥ मैं बैरागिण आदिकी जी थांरे म्हारे कदको सनेस। बिन पाणी बिन साबुण जी होय ग धोय सफेद॥ जोगण होय जंगल सब हेरूं छोड़ा ना कुछ सैस। तेरी सुरत के कारणे जी म्हे… Continue reading बंसीवारा आज्यो म्हारे देस, सांवरी सुरत वारी बेस / मीराबाई

Published
Categorized as Mirabai

बादल देख डरी हो स्याम मैं बादल देख डरी / मीराबाई

बादल देख डरी हो स्याम मैं बादल देख डरी। श्याम मैं बादल देख डरी। काली-पीली घटा ऊमड़ी बरस्यो एक घरी। श्याम मैं बादल देख डरी। जित जाऊं तित पाणी पाणी हु भोम हरी॥ श्याम मैं बादल देख डरी। जाका पिय परदेस बसत है भीजूं बाहर खरी। श्याम मैं बादल देख डरी। मीरा के प्रभु हरि… Continue reading बादल देख डरी हो स्याम मैं बादल देख डरी / मीराबाई

Published
Categorized as Mirabai

गली तो चारों बंद हु हैं मैं हरिसे मिलूं कैसे जाय / मीराबाई

गली तो चारों बंद हु हैं मैं हरिसे मिलूं कैसे जाय॥ ऊंची-नीची राह रपटली पांव नहीं ठहराय। सोच सोच पग धरूं जतन से बार-बार डिग जाय॥ ऊंचा नीचां महल पिया का म्हांसूं चढ्यो न जाय। पिया दूर पथ म्हारो झीणो सुरत झकोला खाय॥ कोस कोस पर पहरा बैठया पैग पैग बटमार। हे बिधना कैसी रच… Continue reading गली तो चारों बंद हु हैं मैं हरिसे मिलूं कैसे जाय / मीराबाई

Published
Categorized as Mirabai

सुण लीजो बिनती मोरी मैं शरण गही प्रभु तेरी / मीराबाई

सुण लीजो बिनती मोरी मैं शरण गही प्रभु तेरी। तुम तो पतित अनेक उधारे भव सागर से तारे॥ मैं सबका तो नाम न जानूं को कोई नाम उचारे। अम्बरीष सुदामा नामा तुम पहुंचाये निज धामा। ध्रुव जो पांच वर्ष के बालक तुम दरस दिये घनस्यामा। धना भक्त का खेत जमाया कबिरा का बैल चराया॥ सबरी… Continue reading सुण लीजो बिनती मोरी मैं शरण गही प्रभु तेरी / मीराबाई

Published
Categorized as Mirabai

हे मेरो मनमोहना आयो नहीं सखी री / मीराबाई

हे मेरो मनमोहना आयो नहीं सखी री। कैं कहुं काज किया संतन का। कैं कहुं गैल भुलावना॥ हे मेरो मनमोहना। कहा करूं कित जाऊं मेरी सजनी। लाग्यो है बिरह सतावना॥ हे मेरो मनमोहना॥ मीरा दासी दरसण प्यासी। हरि-चरणां चित लावना॥ हे मेरो मनमोहना॥

Published
Categorized as Mirabai

स्याम मने चाकर राखो जी गिरधारी लाला चाकर राखो जी / मीराबाई

स्याम मने चाकर राखो जी गिरधारी लाला चाकर राखो जी। चाकर रहसूं बाग लगासूं नित उठ दरसण पासूं। बिंद्राबन की कुंजगलिन में तेरी लीला गासूं॥ चाकरी में दरसण पाऊं सुमिरण पाऊं खरची। भाव भगति जागीरी पाऊं तीनूं बाता सरसी॥ मोर मुकुट पीतांबर सोहै गल बैजंती माला। बिंद्राबन में धेनु चरावे मोहन मुरलीवाला॥ हरे हरे नित… Continue reading स्याम मने चाकर राखो जी गिरधारी लाला चाकर राखो जी / मीराबाई

Published
Categorized as Mirabai

मैं गिरधर के घर जाऊं / मीराबाई

मैं गिरधर के घर जाऊं। गिरधर म्हांरो सांचो प्रीतम देखत रूप लुभाऊं॥ रैण पड़ै तबही उठ जाऊं भोर भये उठि आऊं। रैन दिना वाके संग खेलूं ज्यूं त।ह्यूं ताहि रिझाऊं॥ जो पहिरावै सोई पहिरूं जो दे सोई खाऊं। मेरी उणकी प्रीति पुराणी उण बिन पल न रहाऊं। जहां बैठावें तितही बैठूं बेचै तो बिक जाऊं।… Continue reading मैं गिरधर के घर जाऊं / मीराबाई

Published
Categorized as Mirabai

तेरो कोई नहिं रोकणहार मगन हो मीरा चली / मीराबाई

रोकणहार मगन हो मीरा चली॥ लाज सरम कुल की मरजादा सिरसै दूर करी। मान-अपमान दो धर पटके निकसी ग्यान गली॥ ऊंची अटरिया लाल किंवड़िया निरगुण-सेज बिछी। पंचरंगी झालर सुभ सोहै फूलन फूल कली। बाजूबंद कडूला सोहै सिंदूर मांग भरी। सुमिरण थाल हाथ में लीन्हों सौभा अधिक खरी॥ सेज सुखमणा मीरा सौहै सुभ है आज घरी।… Continue reading तेरो कोई नहिं रोकणहार मगन हो मीरा चली / मीराबाई

Published
Categorized as Mirabai