सैर-गाह-ए-दुनिया का हासिल-ए-तमाशा क्या रंग-ओ-निकहत-ए-गुल पर अपना था इजारा क्या खेल है मोहब्बत में जान ओ दिल का सौदा क्या देखिये दिखाती है अब ये ज़िंदगी क्या क्या जब भी जी उमड़ आया रो लिए घड़ी भर को आँसुओं की बारिश से मौसमों का रिश्ता क्या कब सर-ए-नज़ारा था हम को बज़्म-ए-आलम का यूँ भी… Continue reading सैर-गाह-ए-दुनिया का / ‘अख्तर’ सईद खान
Category: Hindi-Urdu Poets
सफ़र ही शर्त-ए-सफ़र है / ‘अख्तर’ सईद खान
सफ़र ही शर्त-ए-सफ़र है तो ख़त्म क्या होगा तुम्हारे घर से उधर भी ये रास्ता होगा ज़माना सख़्त गिराँ ख़्वाब है मगर ऐ दिल पुकार तो सही कोई तो जागता होगा ये बे-सबब नहीं आए हैं आँख में आँसू ख़ुशी का लम्हा कोई याद आ गया होगा मेरा फ़साना हर इक दिल का माजरा तो… Continue reading सफ़र ही शर्त-ए-सफ़र है / ‘अख्तर’ सईद खान
मुद्दत से लापता है / ‘अख्तर’ सईद खान
मुद्दत से लापता है ख़ुदा जाने क्या हुआ फिरता था एक शख़्स तुम्हें पूछता हुआ वो ज़िंदगी थी आप थे या कोई ख़्वाब था जो कुछ था एक लम्हे को बस सामना हुआ हम ने तेरे बग़ैर भी जी कर दिखा दिया अब ये सवाल क्या है के फिर दिल का क्या हुआ सो भी… Continue reading मुद्दत से लापता है / ‘अख्तर’ सईद खान
कहें किस से हमारा / ‘अख्तर’ सईद खान
कहें किस से हमारा खो गया क्या किसी को क्या के हम को हो गया क्या खुली आँखों नज़र आता नहीं कुछ हर इक से पूछता हूँ वो गया क्या मुझे हर बात पर झुटला रही है ये तुझ बिन ज़िंदगी को हो गया क्या उदासी राह की कुछ कह रही है मुसाफ़िर रास्ते में… Continue reading कहें किस से हमारा / ‘अख्तर’ सईद खान
कभी ज़बाँ पे न आया / ‘अख्तर’ सईद खान
कभी ज़बाँ पे न आया के आरज़ू क्या है ग़रीब दिल पे अजब हसरतों का साया है सबा ने जागती आँखों को चूम चूम लिया न जाने आख़िर-ए-शब इंतिज़ार किस का है ये किस की जलवा-गरी काएनात है मेरी के ख़ाक हो के भी दिल शोला-ए-तमन्ना है तेरी नज़र की बहार-आफ़रीनियाँ तस्लीम मगर ये दिल… Continue reading कभी ज़बाँ पे न आया / ‘अख्तर’ सईद खान
दिल-ए-शोरीदा की वहशत / ‘अख्तर’ सईद खान
दिल-ए-शोरीदा की वहशत नहीं देखी जाती रोज़ इक सर पे क़यामत नहीं देखी जाती अब उन आँखों में वो अगली सी नदामत भी नहीं अब दिल-ए-ज़ार की हालत नहीं देखी जाती बंद कर दे कोई माज़ी का दरीचा मुझ पर अब इस आईने में सूरत नहीं देखी जाती आप की रंजिश-ए-बे-जा ही बहुत है मुझ… Continue reading दिल-ए-शोरीदा की वहशत / ‘अख्तर’ सईद खान
दिल की राहें ढूँढने / ‘अख्तर’ सईद खान
दिल की राहें ढूँडने जब हम चले हम से आगे दीदा-ए-पुर-नम चले तेज़ झोंका भी है दिल को ना-गवार तुम से मस हो कर हवा कम कम चले थी कभी यूँ क़द्र-ए-दिल इस बज़्म में जैसे हाथों-हाथ जाम-ए-जम चले है वो आरिज़ और उस पर चश्म-ए-पुर-नम गुल पे जैसे क़तरा-ए-शबनम चले आमद-ए-सैलाब का वक़्फ़ा था… Continue reading दिल की राहें ढूँढने / ‘अख्तर’ सईद खान
दीदनी है ज़ख़्म-ए-दिल / ‘अख्तर’ सईद खान
दीदनी है ज़ख़्म-ए-दिल और आप से पर्दा भी क्या इक ज़रा नज़दीक आ कर देखिए ऐसा भी क्या हम भी ना-वाक़िफ़ नहीं आदाब-ए-महफ़िल से मगर चीख़ उठें ख़ामोशियाँ तक ऐसा सन्नाटा भी क्या ख़ुद हमीं जब दस्त-ए-क़ातिल को दुआ देते रहे फिर कोई अपनी सितम-गारी पे शरमाता भी क्या जितने आईने थे सब टूटे हुए… Continue reading दीदनी है ज़ख़्म-ए-दिल / ‘अख्तर’ सईद खान
आज भी दश्त-ए-बला में / ‘अख्तर’ सईद खान
आज भी दश्त-ए-बला में नहर पर पहरा रहा कितनी सदियों बाद मैं आया मगर प्यासा रहा क्या फ़ज़ा-ए-सुब्ह-ए-ख़ंदाँ क्या सवाद-ए-शाम-ए-ग़म जिस तरफ़ देखा किया मैं देर तक हँसता रहा इक सुलगता आशियाँ और बिजलियों की अंजुमन पूछता किस से के मेरे घर में क्या था क्या रहा ज़िंदगी क्या एक सन्नाटा था पिछली रात का… Continue reading आज भी दश्त-ए-बला में / ‘अख्तर’ सईद खान
ओ देस से आने वाले बता! / ‘अख्तर’ शीरानी
ओ देस से आने वाले बता! क्या अब भी वहां के बाग़ों में मस्ताना हवाएँ आती हैं? क्या अब भी वहां के परबत पर घनघोर घटाएँ छाती हैं? क्या अब भी वहां की बरखाएँ वैसे ही दिलों को भाती हैं? ओ देस से आने वाले बता! क्या अब भी वतन में वैसे ही सरमस्त नज़ारे… Continue reading ओ देस से आने वाले बता! / ‘अख्तर’ शीरानी