दिल में वो शोर न आँखों में वो नम रहता है अब तप-ए-हिज्र तवक़्क़ो से भी कम रहता है कभी शोले से लपकते थे मेरे सीने में अब किसी वक़्त धुआँ से कोई दम रहता है क्या ख़ुदा जाने मेरे दिल को हुआ तेरे बाद न ख़ुशी इस में ठहरती है न ग़म रहता है… Continue reading दिल में वो शोर न आँखों में वो नम रहता है / अहमद मुश्ताक़
Category: Hindi-Urdu Poets
छिन गई तेरी तमन्ना भी तमन्नाई से / अहमद मुश्ताक़
छिन गई तेरी तमन्ना भी तमन्नाई से दिल बहलते हैं कहीं हौसला-अफ़ज़ाई से कैसा रोशन था तेरा नींद में डूबा चेहरा जैसे उभरा हो किसी ख़्वाब की गहराई से वही आशुफ़्ता-मिज़ाजी वही ख़ुशिय़ाँ वही ग़म इश्क़ का काम लिया हम ने शनासाई से न कभी आँख भर आई न तेरा नाम लिया बच के चलते… Continue reading छिन गई तेरी तमन्ना भी तमन्नाई से / अहमद मुश्ताक़
चमक दमक पे न जाओ खरी नहीं कोई शय / अहमद मुश्ताक़
चमक दमक पे न जाओ खरी नहीं कोई शय सिवाए शाख़-ए-तमन्ना हरी नहीं कोई शय दिल-ए-गुदाज़ ओ लब-ए-ख़ुश्क ओ चश्म-ए-तर के बग़ैर ये इल्म ओ फ़ज़्ल ये दानिश्वरी नहीं कोई शय तो फिर ये कशमकश-ए-दिल कहाँ से आई है जो दिल-गिरफ़्तगी ओ दिलबरी नहीं कोई शय अजब हैं वो रुख़ ओ गेसू के सामने जिन… Continue reading चमक दमक पे न जाओ खरी नहीं कोई शय / अहमद मुश्ताक़
चाँद इस घर के दरीचों के बराबर आया / अहमद मुश्ताक़
चाँद इस घर के दरीचों के बराबर आया दिल-ए-मुश्ताक़ ठहर जा वही मंज़र आया मैं बहुत ख़ुश था कड़ी धूप के सन्नाटे में क्यूँ तेरी याद का बादल मेरे सर पर आया बुझ गई रौनक़-ए-परवाना तो महफ़िल चमकी सो गए अहल-ए-तमन्ना तो सितम-गर आया यार सब जम्मा हुए रात की ख़ामोशी में कोई रो कर… Continue reading चाँद इस घर के दरीचों के बराबर आया / अहमद मुश्ताक़
अब वो गलियाँ वो मकाँ याद नहीं / अहमद मुश्ताक़
अब वो गलियाँ वो मकाँ याद नहीं कौन रहता था कहाँ याद नहीं जलवा-ए-हुस्न-ए-अज़ल थे वो दयार जिन के अब नाम ओ निशाँ याद नहीं कोई उजला सा भला सा घर था किस को देखा था वहाँ याद नहीं याद है ज़ीन-ए-पेचाँ उस का दर-ओ-दीवार-ए-मकाँ याद नहीं याद है ज़मज़मा-ए-साज़-ए-बहार शोर-ए-आवाज़-ए-ख़िज़ाँ याद नहीं
अब मंज़िल-ए-सदा से सफ़र कर / अहमद मुश्ताक़
अब मंज़िल-ए-सदा से सफ़र कर रहे हैं हम यानी दिल-ए-सुकूत में घर कर रहे हैं हम खोया है कुछ ज़रूर जो उस की तलाश में हर चीज़ को इधर से उधर कर रहे हैं हम गोया ज़मीन कम थी तग-ओ-ताज़ के लिए पैमाइश-ए-नुजूम-ओ-क़मर कर रहे हैं हम काफ़ी न था जमाल-ए-रुख़-ए-साद-ए-बहार ज़ेबाइश-ए-गियाह-ओ-शजर कर रहे हैं… Continue reading अब मंज़िल-ए-सदा से सफ़र कर / अहमद मुश्ताक़
मैं बुरा ही सही भला न सही / ‘ऐश’ देलहवी
मैं बुरा ही सही भला न सही पर तेरी कौन सी जफ़ा न सही दर्द-ए-दिल हम तो उन से कह गुज़रे गर उन्हों ने नहीं सुना न सही शब-ए-ग़म में बला से शुग़ल तो है नाला-ए-दिल मेरा रसा न सही दिल भी अपना नहीं रहा न रहे ये भी ऐ चर्ख़-ए-फ़ित्ना-ज़ा न सही देख तो… Continue reading मैं बुरा ही सही भला न सही / ‘ऐश’ देलहवी
क्या हुए आशिक़ उस शकर-लब के / ‘ऐश’ देलहवी
क्या हुए आशिक़ उस शकर-लब के ताने सहने पड़े हमें सब के भूलना मत बुतों की यारी पर हैं ये बद-केश अपने मतलब के क़ैस ओ फ़रहाद चल बसे अफ़सोस थे वो कम-बख़्त अपने मशरब के शैख़ियाँ शैख़ जी की देंगे दिखा मिल गए वो अगर कहीं अब के याद रखना कभी न बचिएगा मिल… Continue reading क्या हुए आशिक़ उस शकर-लब के / ‘ऐश’ देलहवी
कुछ कम नहीं है शम्मा से दिल की / ‘ऐश’ देलहवी
कुछ कम नहीं है शम्मा से दिल की लगन में हम फ़ानूस में वो जलती है याँ पैरहन में हम हैं तुफ़्ता-जाँ मुफ़ारक़त-ए-गुल-बदन में हम ऐसा न हो के आग लगा दें चमन में हम गुम होंगे बू-ए-ज़ुल्फ़-ए-शिकन-दर-शिकन में हम क़ब्ज़ा करेंगे चीन को ले कर ख़तन में हम गर ये ही छेड़ दस्त-ए-जुनूँ की… Continue reading कुछ कम नहीं है शम्मा से दिल की / ‘ऐश’ देलहवी
जुरअत ऐ दिल मय ओ मीना है / ‘ऐश’ देलहवी
जुरअत ऐ दिल मय ओ मीना है वो ख़ुद काम भी है बज़्म अग़्यार से ख़ाली भी है और शाम भी है ज़ुल्फ़ के नीचे ख़त-ए-सब्ज़ तो देखा ही न था ऐ लो एक और नया दाम तह-ए-दाम भी है चारा-गर जाने दे तकलीफ़-ए-मदवा है अबस मर्ज़-ए-इश्क़ से होता कहीं आराम भी है हो गया… Continue reading जुरअत ऐ दिल मय ओ मीना है / ‘ऐश’ देलहवी