रेत से बुत न बना मेरे अच्छे फ़नकार एक लम्हे को ठहर मैं तुझे पत्थर ला दूँ मैं तेरे सामने अम्बार लगा दूँ लेकिन कौन से रंग का पत्थर तेरे काम आएगा सुर्ख़ पत्थर जिसे दिल कहती है बेदिल दुनिया या वो पत्थराई हुई आँख का नीला पत्थर जिस में सदियों के तहय्युर के पड़े… Continue reading रेत से बुत न बना / अहमद नदीम क़ासमी
Category: Hindi-Urdu Poets
लबों पे नर्म तबस्सुम / अहमद नदीम क़ासमी
लबों पे नर्म तबस्सुम रचा कि धुल जाएँ ख़ुदा करे मेरे आंसू किसी के काम आएँ जो इब्तदा-ए-सफ़र में दिए बुझा बैठे वो बदनसीब किसी का सुराग़ क्या पाएँ तलाश-ए-हुस्न कहाँ ले चली ख़ुदा जाने उमंग थी कि फ़क़त जि़न्दगी को अपनाएँ बुला रहे है उफ़क़ पर जो ज़र्द-रू टीले कहो तो हम भी फ़साने… Continue reading लबों पे नर्म तबस्सुम / अहमद नदीम क़ासमी
वो कोई और न था / अहमद नदीम क़ासमी
वो कोई और न था चंद ख़ुश्क पत्ते थे, शजर से टूट के जो फ़स्ल-ए-गुल पे रोए थे| अभी अभी तुम्हें सोचा तो कुछ न याद आया, अभी अभी तो हम एक दूसरे से बिछड़े थे| तुम्हारे बाद चमन पर जब इक नज़र डाली, कली कली में ख़िज़ां के चिराग़ जलते थे| तमाम उम्र वफ़ा… Continue reading वो कोई और न था / अहमद नदीम क़ासमी
मरूं तो मैं किसी चेहरे में रंग भर जाऊं / अहमद नदीम क़ासमी
मरूँ तो मैं किसी चेहरे में रंग भर जाऊँ| नदीम! काश यही एक काम कर जाऊँ| ये दश्त-ए-तर्क-ए-मुहब्बत ये तेरे क़ुर्ब की प्यास, जो इज़ाँ हो तो तेरी याद से गुज़र जाऊँ| मेरा वजूद मेरी रूह को पुकारता है, तेरी तरफ़ भी चलूं तो ठहर ठहर जाऊँ| तेरे जमाल का परतो है सब हसीनों पर… Continue reading मरूं तो मैं किसी चेहरे में रंग भर जाऊं / अहमद नदीम क़ासमी
मैं कब से गोश बर-आवाज़ हूँ पुकारो भी / अहमद नदीम क़ासमी
मैं कब से गोश-बर-आवाज़[1] हूँ पुकारो भी ज़मीं पर यह सितारे कभी उतारो भी मेरी गय्यूर[2] उमंगो, शबाब फानी है गुरूर-ए-इश्क़ का देरीना खेल हारो भी भटक रहा है धुन्धल्कों में कारवान-ए-ख़याल बस अब खुदा के लिए काकुलें[3] संवारो भी मेरी तलाश की मेराज[4] हो तुम्हीं लेकिन नकाब उठाओ, निशान-ए-सफ़र उभारो भी यह कायनात, अजल… Continue reading मैं कब से गोश बर-आवाज़ हूँ पुकारो भी / अहमद नदीम क़ासमी
जब तेरा हुक्म मिला / अहमद नदीम क़ासमी
जब तेरा हुक्म मिला, तर्क मुहब्बत कर दी, दिल मगर उस पे वो धडका, कि क़यामत कर दी| तुझसे किस तरह मैं इज़हार-ए-तमन्ना करता, लफ़्ज़ सूझा तो मआनी ने बग़ावत कर दी| मैं तो समझा था कि लौट आते हैं जाने वाले, तूने जाकर तो जुदाई मेरी कि़स्मत कर दी| मुझको दुश्मन के वादों पे… Continue reading जब तेरा हुक्म मिला / अहमद नदीम क़ासमी
लब-ए-ख़ामोश से अफ्शा होगा / अहमद नदीम क़ासमी
लब-ए-ख़ामोश से अफ्शा होगा राज़ हर रंग में रुस्वा होगा दिल के सहरा में चली सर्द हवा अबर् गुलज़ार पर बरसा होगा तुम नहीं थे तो सर-ए-बाम-ए-ख़याल याद का कोई सितारा होगा किस तवक्क़ो पे किसी को देखें कोई तुम से भी हसीं क्या होगा ज़ीनत-ए-हल्क़ा-ए-आग़ोश बनो दूर बैठोगे तो चर्चा होगा ज़ुल्मत-ए-शब में भी… Continue reading लब-ए-ख़ामोश से अफ्शा होगा / अहमद नदीम क़ासमी
शाम को सुबह-ए-चमन याद आई / अहमद नदीम क़ासमी
शाम को सुबह-ए-चमन याद आई, किसकी ख़ुश्बू-ए-बदन याद आई| जब ख़यालों में कोई मोड़ आया, तेरे गेसू की शिकन याद आई| याद आए तेरे पैकर के ख़ुतूत, अपनी कोताही-ए-फ़न याद आई| चांद जब दूर उफ़क़ पर डूबा, तेरे लहजे की थकन याद आई| दिन शुआओं से उलझते गुज़रा, रात आई तो किरन याद आई|
गुल तेरा रंग चुरा लाए हैं / अहमद नदीम क़ासमी
गुल तेरा रंग चुरा लाए हैं गुलज़ारों में जल रहा हूँ भरी बरसात की बौछारों में मुझसे कतरा के निकल जा, मगर ऐ जान-ए-हया दिल की लौ देख रहा हूं तेरे रुख़सारों में हुस्न-ए-बेगाना-ए-एहसास-जमाल अच्छा है ग़ुन्चे खिलते हैं तो बिक जाते हैं बाज़ारों में जि़क्र करते हैं तेरा मुझसे बाउनवान-ए-जफ़ा चारागर फूल पिरो लाए… Continue reading गुल तेरा रंग चुरा लाए हैं / अहमद नदीम क़ासमी
किस को क़ातिल / अहमद नदीम क़ासमी
किस को क़ातिल मैं कहूं किस को मसीहा समझूं सब यहां दोस्त ही बैठे हैं किसे क्या समझूं वो भी क्या दिन थे की हर वहम यकीं होता था अब हक़ीक़त नज़र आए तो उसे क्या समझूं दिल जो टूटा तो कई हाथ दुआ को उठे ऐसे माहौल में अब किस को पराया समझूं ज़ुल्म… Continue reading किस को क़ातिल / अहमद नदीम क़ासमी