पानी में पौर अगन नाचे / हंसकुमार तिवारी

सावन चहुँ ओर सघन नाचे चंचल मनमोर मगन नाचे। सन-सन की बीन बजे मेघों का मांदर झम-झम की झांझ और रिमझिम का झांझर चपला चितचोर नयन नाचे। सावन चहुँ ओर सघन नाचे खेतों में धान हँसे बागों में कलियाँ तरुओं की रानी की वन-वन रंगरलियाँ यौवन मदभोर भुवन नाचे। सावन चहुँ ओर सघन नाचे कानन… Continue reading पानी में पौर अगन नाचे / हंसकुमार तिवारी