Wazir Agha Archive

धूप के साथ गया साथ निभाने वाला / वज़ीर आग़ा

धूप के साथ गया, साथ निभाने वाला अब कहाँ आएगा वो, लौट के आने वाला रेत पर छोड़ गया, नक़्श हज़ारों अपने किसी पागल की तरह, नक़्श मिटाने वाला सब्ज़ शाखें कभी, ऐसे तो नहीं चीखतीं हैं कौन आया है, …

सितम हवा का अगर तेरे तन को रास नहीं / वज़ीर आग़ा

सितम हवा का अगर तेरे तन को रास नहीं कहाँ से लाऊँ वो झोंका जो मेरे पास नहीं पिघल चुका हूँ तमाज़त में आफ़ताब की मैं मेरा वजूद भी अब मेरे आस-पास नहीं मेरे नसीब में कब थी बरहनगी अपनी …