Wasif Dehlvi Archive

हम-सफ़र थम तो सही दिल को सँभालूँ तो चलूँ / ‘वासिफ़’ देहलवी

हम-सफ़र थम तो सही दिल को सँभालूँ तो चलूँ मंज़िल-ए-दोस्त पे दो अश्क बहा लूँ तो चलूँ हर क़दम पर हैं मिरे दिल को हज़ारों उलझाओ दामन-ए-सब्र को काँटों से छुड़ा लूँ तो चलूँ मुझ सा कौन आएगा तजदीद-ए-मकारिम के …

बुझते हुए चराग़ फ़रोजाँ करेंगे हम / ‘वासिफ़’ देहलवी

बुझते हुए चराग़ फ़रोजाँ करेंगे हम तुम आओगे तो जश्न-ए-चराग़ाँ करेंगे हम बाक़ी है ख़ाक-ए-कू-ए-मोहब्बत की तिश्नगी अपने लहू को और भी अर्ज़ां करेंगे हम बे-चारगी के हो गए ये चारागर शिकार अब ख़ुद ही अपने दर्द का दरमाँ करेंगे …