Waryam Singh Archive

नज़र आना साबुत / वरयाम सिंह

तो मैं साबुत नज़र आ रहा हूँ आपको। कृपया आप अपनी आँखों से मुझे अपने को देखने दें देखने दें किस तरह टुकड़ा-टुकड़ा हुआ आदमी नज़र आता है साबुत। कृपया मुझे बताएँ यदि मैं साबुत हूँ तो अपने को टुकड़ा-टुकड़ा …

एक ही जगह पर / वरयाम सिंह

यह क़दमताल था हर क़दमताल की तरह एक ही जगह पर । झण्डा भी लहरा रहा था मुस्तैदी से एक ही जगह पर । नेता भी खड़ा था एक ही जगह पर तमाम उपलब्धियाँ, तमाम सफलताएँ, तरह-तरह के दस्तावेज़ों में …