Satish Shukla ‘Raqeeb’ Archive

कल जो कहते रहे आएंगे न जाने वाले / सतीश शुक्ला ‘रक़ीब’

कल जो कहते रहे आएंगे न जाने वाले मुन्तज़िर वो भी हैं, वो आज हैं आने वाले बेस क़ीमत है यहाँ बूँद भी इक पानी की याद रक्खें इसे, बेवज़ह बहाने वाले शम्स ता क़मर, ज़मीं, झील कि दरिया, पर्वत …

बेवफ़ाई का सिला भी जो वफ़ा देते हैं / सतीश शुक्ला ‘रक़ीब’

बेवफ़ाई का सिला भी जो वफ़ा देते हैं अपनी फ़ितरत का ज़माने को पता देते हैं आप बाहोश रहें सोच-समझ कर बोलें तल्ख़ जुमले भी यहां आग लगा देते हैं आह मजलूम की मुंसिफ़ को न जीने देगी गर वो …