Sanjay Kumar Singh Archive

नींद में पुल / संजय कुमार सिंह

बार-बार समय को पकड़ना कविता में अपने आपको पकड़ना है। मैं लौटकर आ गया हूँ उन्हीं सवालों के नीचे कितना कठिन है मेरा समय? कितना कठिन है जीवन? …रोज़ मैं उन रास्तों को पार करता हूँ थके होने के बाजवूद …

हमारे पास एक दिन जब / संजय कुमार सिंह

हमारे पास एक दिन जब केवल दुःखों की दुनिया बच जाएगी हम सोचेंगे अपने तमाम अच्छे-बुरे विशेषणों के साथ उनके बारे में / हमें कहना ही पड़ेगा यह दुःख उजला था / वह काला / यह चमकीला वह पीला भूरा …