Ram Naresh Tripathi Archive

मामी निशा / रामनरेश त्रिपाठी

चंदा मामा गए कचहरी, घर में रहा न कोई, मामी निशा अकेली घर में कब तक रहती सोई! चली घूमने साथ न लेकर कोई सखी-सहेली, देखी उसने सजी-सजाई सुंदर एक हवेली! आगे सुंदर, पीछे सुंदर, सुंदर दाएँ-बाएँ, नीचे सुंदर, ऊपर …

तिल्लीसिंह / रामनरेश त्रिपाठी

पहने धोती कुरता झिल्ली, गमछे से लटकाए किल्ली, कस कर अपनी घोड़ी लिल्ली, तिल्लीसिंह जा पहुँचे दिल्ली! पहले मिले शेख जी चिल्ली, उनकी बहुत उड़ाई खिल्ली, चिल्ली ने पाली थी बिल्ली, तिल्लीसिंह ने पाली पिल्ली! पिल्ली थी दुमकटी चिबिल्ली, उसने …

चतुर चित्रकार / रामनरेश त्रिपाठी

चित्रकार सुनसान जगह में, बना रहा था चित्र, इतने ही में वहाँ आ गया, यम राजा का मित्र। उसे देखकर चित्रकार के तुरत उड़ गए होश, नदी, पहाड़, पेड़, पत्तों का, रह न गया कुछ जोश। फिर उसको कुछ हिम्मत …

अतुलनीय जिनके प्रताप का / रामनरेश त्रिपाठी

अतुलनीय जिनके प्रताप का, साक्षी है प्रत्यक्ष दिवाकर। घूम घूम कर देख चुका है, जिनकी निर्मल किर्ति निशाकर। देख चुके है जिनका वैभव, ये नभ के अनंत तारागण। अगणित बार सुन चुका है नभ, जिनका विजय-घोष रण-गर्जन। शोभित है सर्वोच्च …

वह देश कौन सा है / रामनरेश त्रिपाठी

मन-मोहिनी प्रकृति की गोद में जो बसा है। सुख-स्वर्ग-सा जहाँ है वह देश कौन-सा है? जिसका चरण निरंतर रतनेश धो रहा है। जिसका मुकुट हिमालय वह देश कौन-सा है? नदियाँ जहाँ सुधा की धारा बहा रही हैं। सींचा हुआ सलोना …

पुष्प विकास / रामनरेश त्रिपाठी

एक दिन मोहन प्रभात ही पधारे, उन्हें देख फूल उठे हाथ-पांव उपवन के । खोल-खोल द्वार फूल घर से निकल आए, देख के लुटाए निज कोष सुबरन के ।। वैसी छवि और कहीं खोजने सुगंध उडी, पाई न, लजा के …

आगे बढ़े चलेंगे / रामनरेश त्रिपाठी

यदि रक्त बूँद भर भी होगा कहीं बदन में नस एक भी फड़कती होगी समस्त तन में । यदि एक भी रहेगी बाक़ी तरंग मन में । हर एक साँस पर हम आगे बढ़े चलेंगे । वह लक्ष्य सामने है …

तिल्ली सिंह / रामनरेश त्रिपाठी

पहने धोती कुरता झिल्ली गमछे से लटकाये किल्ली कस कर अपनी घोड़ी लिल्ली तिल्ली सिंह जा पहुँचे दिल्ली पहले मिले शेख जी चिल्ली उनकी बहुत उड़ाई खिल्ली चिल्ली ने पाली थी बिल्ली तिल्ली ने थी पाली पिल्ली पिल्ली थी दुमकटी …

चले चलो / रामनरेश त्रिपाठी

(१) आए और चले गए, कितने शिशिर वसंत। राही! तेरी राह का, कहीं न आया अंत॥ कहीं न आया अंत, तुझे तो चलना ही है। जीवन की यह आग, जलाकर जलना ही है॥ दम है साथी एक, यही नित आए …