Pankaj Singh Archive

पश्चात सच / पंकज सिंह

धब्बों भरी एक चीख़ अटकी मिली मृतक के स्वरयंत्र में टूटे हुए शब्दों में लिपटी जो जकड़ा था इर्द-गिर्द उसके श्लेष्मा की तरह वह किश्तों में निगला भय था लगभग प्रस्तरीभूत जिसने उसके सारे कहे को नागरिक बनाया था जीवन …

शरद के बादल / पंकज सिंह

फिर सताने आ गए हैं शरद के बादल धूप हल्की-सी बनी है स्वप्न क्यों भला ये आ गए हैं यों सताने शरद के बादल धैर्य धरती का परखने और सूखी हड्डियों में कंप भरने हवाओं की तेज़ छुरियाँ लपलपाते आ …