Naeem Archive

कुछ भी तो अब / नईम

कुछ भी तो अब तन्त नहीं है- ऊपरवाले की लाठी में। दीमक चाट गयी है शायद- ये भी ऊपरवाला जाने, भुस में तिनगी जिसने डाली- वही जमालो खाला जाने। हम तो खड़े हुए हैं घर के पानीपत हल्दीघाटी में। दो …

लिख सकूँ तो (कविता) / नईम

लिख सकूँ तो— प्यार लिखना चाहता हूँ, ठीक आदमजात सा बेखौफ़ दिखना चाहता हूँ। थे कभी जो सत्य, अब केवल कहानी नर्मदा की धार सी निर्मल रवानी, पारदर्शी नेह की क्या बात करिए- किस क़दर बेलौस ये दादा भवानी। प्यार …